मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
Devendra Fadnavis Response To Raj Thackeray: मुंबई के विकास को लेकर मनसे प्रमुख राज ठाकरे द्वारा दिए गए बयान पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ा पलटवार किया है। राज ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री नागपुर के हैं और मुंबई के मुद्दे व समस्याएं समझने के लिए मुंबई में जन्म लेना जरूरी है। इस पर जवाब देते हुए देवेंद्र फडणवीस ने सवाल उठाया कि आप इतने वर्षों तक मुंबई की राजनीति में रहे, लेकिन मुंबई के मराठी लोगों के लिए आपने क्या किया?
सीएम फडणवीस ने कहा कि मुंबई के विकास की असली शुरुआत नागपुर के नितिन गडकरी के कार्यकाल में हुई। हम मुंबई में पैदा नहीं हुए, यह हमारा दोष नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज का यह पूरा बयान सिर्फ हताशा और निराशा से भरा हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि मोदी गुजरात में जन्मे हैं, लेकिन उन्हें कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरे देश की गहरी समझ है। अगर मान भी लें कि मुझे मुंबई नहीं समझ में आती, तो आपको तो आती है। फिर इतने वर्षों में आपने क्या किया?
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मुंबई का मराठी आदमी आज शहर छोड़कर बाहर घर लेने को मजबूर है। आपके पास 25 वर्षों तक मुंबई की सत्ता थी, तब आपने क्या किया? फडणवीस ने बताया कि नितिन गडकरी के नेतृत्व में मुंबई में 55 फ्लाईओवर बने, वर्ली–बांद्रा सी लिंक का निर्माण हुआ और वहीं से मुंबई के विकास को गति मिली। इसके बाद उनके, एकनाथ शिंदे के और फिर उनके ही कार्यकाल में मुंबई के विकास को और आगे बढ़ाया गया।
अजित पवार ने दावा किया था कि पुणे और मुंबई की मेट्रो परियोजनाओं को मनमोहन सिंह के कार्यकाल में मंजूरी मिली थी। इस पर फडणवीस ने कहा कि जो लोग आज हमारे साथ हैं, उनके पास दिखाने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन जो हमारे खिलाफ लड़ते हैं, उनके पास कुछ भी नहीं है, इसलिए उन्हें आरोप लगाने पड़ते हैं।
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फडणवीस ने सवाल किया कि अगर मनमोहन सिंह के समय मेट्रो मंजूर हुई थी, तो वह शुरू क्यों नहीं हुई? उस समय सत्ता किसके हाथ में थी? आखिर देवेंद्र फडणवीस का इंतजार क्यों करना पड़ा? उन्होंने बताया कि मेट्रो परियोजना के लिए नागपुर मेट्रो कंपनी को ‘महामेट्रो’ बनाकर काम करना पड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके विरोधी जानबूझकर तीखे और टोक के बयान देते हैं, ताकि विकास से ध्यान भटकाया जा सके। अजित पवार हमारे मित्र हैं, लेकिन पुणे में वे हमारे राजनीतिक विरोधी हैं। शरद पवार ने कितने वर्षों तक सत्ता चलाई और उनके प्रमुख सहयोगी अजित पवार ही थे-यह सवाल पुणे की जनता पूछेगी। उस समय अजित पवार को जवाब देना पड़ेगा।