Devendra Fadnavis on Missing Ladies (डिजाइन फोटो)
Devendra Fadnavis on Missing Ladies: महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र में आज महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक खुलासा हुआ है। राज्य सरकार द्वारा सदन में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में महाराष्ट्र से 93,940 महिलाएं लापता हुई हैं। जैसे ही ये आंकड़े पटल पर रखे गए, विपक्षी दल महाविकास अघाड़ी (MVA) ने सरकार पर तीखा हमला बोला और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर ‘कोहराम’ मच गया।
इन आंकड़ों ने ‘लापता लेडीज‘ के मुद्दे को राज्य की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। सरकार की रिपोर्ट बताती है कि गायब होने वाली महिलाओं की संख्या में साल-दर-साल वृद्धि हो रही है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
गृह विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में 45,662 महिलाएं लापता हुई थीं, जबकि साल 2025 में यह संख्या बढ़कर 48,278 तक पहुंच गई। इन दो वर्षों का कुल योग 93,940 है। विपक्ष ने इन आंकड़ों को “भयानक” करार देते हुए आरोप लगाया कि महाराष्ट्र अब महिलाओं के लिए असुरक्षित होता जा रहा है। सदन में चर्चा के दौरान विपक्षी विधायकों ने पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं का गायब होना क्या किसी बड़े संगठित अपराध या मानव तस्करी (Human Trafficking) का हिस्सा है?
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जैसे ही ये आंकड़े जारी हुए, विपक्षी खेमे से नारेबाजी शुरू हो गई। शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के विधायकों ने सदन की कार्यवाही के दौरान वेल में आकर प्रदर्शन किया। महिला विधायकों ने सरकार को घेरते हुए कहा कि “बेटी बचाओ” का नारा देने वाली सरकार के शासन में बेटियां गायब हो रही हैं। विपक्ष ने गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन केवल राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त है और आम महिलाओं की सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है।
आलोचनाओं का जवाब देते हुए गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि लापता होने वाली महिलाओं के आंकड़ों को केवल एक नजरिए से देखना गलत है। उन्होंने दावा किया कि लापता होने वाली महिलाओं में से 80 से 90 प्रतिशत महिलाओं को पुलिस वापस ढूंढने में सफल रही है। सरकार ने ‘ऑपरेशन मुस्कान’ का हवाला देते हुए बताया कि पुलिस सक्रियता से काम कर रही है और कई महिलाएं पारिवारिक विवाद या प्रेम संबंधों के कारण घर छोड़ती हैं। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि शेष 10-15 प्रतिशत मामलों की गंभीरता से जांच की जा रही है ताकि मानव तस्करी के किसी भी पहलू को उजागर किया जा सके।