‘फैसला लेंगे लेकिन घोषणा नहीं करेंगे’; देवेंद्र फडणवीस ने साफ की किसान कर्जमाफी और लाडकी बहिन योजना पर स्थिति
Election Commission on Farmers Loan Waiver: महाराष्ट्र में किसान कर्जमाफी की घोषणा पर चुनाव आयोग की रोक। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने लाडकी बहिन योजना में 80 लाख अपात्र होने की बात कही।
- Written By: अनिल सिंह
देवेंद्र फडणवीस: आचार संहिता की वजह से नहीं होगा किसान कर्जमाफी का ऐलान (फोटो क्रेडिट-X)
Election Commission on Farmers Loan: महाराष्ट्र में किसानों की बदहाली, सुखा और फसलों के उचित दाम न मिलने के कारण बढ़ती आत्महत्या हमेशा से एक गंभीर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रही हैं। चुनाव के समय महायुति सरकार ने किसानों को संकट से उबारने के लिए जून 2026 में कर्जमाफी लागू करने का बड़ा वादा किया था। आज होने वाली राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक में इस कर्जमाफी के वित्तीय प्रारूप और रूपरेखा पर मुहर लगनी तय मानी जा रही थी। लेकिन ठीक इसी समय चुनाव आयोग द्वारा चुनावी नियमों और आचार संहिता के हवाले से किसी भी प्रकार की नई लोक-लुभावन घोषणा करने पर पाबंदी लगा दिए जाने से सरकार के हाथ बंध गए हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बात करते हुए साफ किया कि सरकार किसानों को राहत देने के अपने वादे के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आज की कैबिनेट बैठक में इस पर गहन चर्चा होगी, आवश्यक वित्तीय आवंटन के मार्ग तय होंगे और सरकारी स्तर पर फाइलें भी आगे बढ़ेंगी, लेकिन आयोग के सम्मान में जनता के बीच इसका औपचारिक एलान रोक दिया जाएगा।
80 लाख पहुंची लाडकी बहिन योजना में अपात्रों की संख्या
मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना को लेकर भी बेहद चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा शुरू की गई ई-केवाईसी (e-KYC) और परिवहन विभाग के डेटाबेस मिलान के बाद बड़े पैमाने पर विसंगतियां सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि योजना का लाभ लेने वाली करीब 5 लाख महिलाओं के परिवारों के पास खुद के चार पहिया वाहन (Four-Wheelers) मौजूद हैं, जबकि कई लाभार्थियों की सालाना पारिवारिक आय 25 लाख रुपये से भी अधिक पाई गई है।
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14 हजार पुरुषों ने भी धोखे से ले लिया योजना का लाभ
इस सरकारी ऑडिट में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि महिलाओं के लिए आरक्षित इस कल्याणकारी योजना में करीब 14,000 पुरुष भी फर्जी दस्तावेजों और तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर लाभार्थी बन बैठे थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन्हीं गंभीर अनियमितताओं को रोकने के लिए सरकार ने जब कड़ाई से पंजीकरण और सत्यापन की स्क्रूटनी शुरू की, तो अपात्र पाए गए आवेदनों का आंकड़ा बढ़कर सीधे 80 लाख के पार चला गया। यह प्रक्रिया अभी अधूरी है और पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था बनने तक जांच जारी रहेगी।
कर्ज में फंसे किसानों की उम्मीदें अब चुनाव नतीजों पर टिकीं
दूसरी तरफ, किसान कर्जमाफी की जमीनी हकीकत यह है कि राज्य के विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में साहूकारों के बढ़ते उत्पीड़न और कर्ज न चुका पाने के कारण किसान लगातार चरम कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। कृषि मंत्री दत्तात्रेय भारणे द्वारा पुण्यश्लोक राजमाता अहिल्यादेवी होल्कर की 301वीं जयंती के मंच से दिए गए आश्वासन के बाद किसानों को उम्मीद थी कि इस जून में उन्हें बैंकों के बकाये से मुक्ति मिल जाएगी। मगर चुनाव आयोग के इस ताजा वीटो के बाद अब किसानों को कर्जमाफी के वास्तविक क्रियान्वयन के लिए राज्य में नई सरकार के गठन और विधानसभा चुनाव के परिणामों का इंतजार करना होगा।
