NEET UG 2026 परिणाम पर छत्रपति संभाजीनगर में उठे बड़े सवाल, दो छात्रों ने कम अंक आने का दावा, 23 को सुनवाई
NEET UG 2026 Result: नीट-यूजी 2026 के परिणाम पर सवाल। बीड के दो छात्रों ने ओएमआर और स्कोरकार्ड में भारी अंतर का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
नीट यूजी 2026 रिजल्ट विवाद (सोर्स: AI)
NEET UG 2026 Result Students Move High Court: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी 2026) के परिणाम को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। बीड जिले के दो विद्यार्थियों ने आरोप लगाया है कि उनकी ओएमआर शीट और आधिकारिक उत्तर कुंजी के अनुसार बनने वाले अंकों तथा जारी स्कोरकार्ड में दर्ज अंकों के बीच भारी अंतर है। इस संबंध में दोनों विद्यार्थियों ने मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ में याचिका दायर की है। न्यायालय ने मामले पर 23 जुलाई को सुनवाई निर्धारित की है।
522 अंक की जगह स्कोरकार्ड में केवल 95 अंक
बीड निवासी छात्र सोहम नितीन गवते ने याचिका में कहा है कि परिणाम घोषित होने के बाद उसने अपनी ओएमआर शीट का आधिकारिक उत्तर कुंजी से मिलान किया। उसके अनुसार उसे 522 अंक मिलने चाहिए थे, जबकि एनटीए द्वारा जारी स्कोरकार्ड में केवल 95 अंक दर्ज किए गए।
छात्र का कहना है कि यह अंतर सामान्य त्रुटि नहीं हो सकता और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे एड. महेंद्र गंडले ने बताया कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर परिणाम में गंभीर विसंगति दिखाई देती है। इसी कारण न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
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सात बार शिकायत, फिर भी नहीं मिला समाधान
छात्र का आरोप है कि परिणाम में अंतर सामने आने के बाद उसने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को सात बार ई-मेल भेजकर शिकायत दर्ज कराई। दूरभाष के माध्यम से भी कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया। एजेंसी की ओर से शिकायत पर कार्रवाई का आश्वासन मिला, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। याचिका में परिणाम की पुनः जांच, अंकों की दोबारा गणना तथा पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
दूसरी छात्रा ने भी लगाया गंभीर आरोप
बीड जिले के वडवणी क्षेत्र की छात्रा ज्ञानेश्वरी अनिलकुमार पवार ने भी इसी प्रकार की शिकायत की है। परिजनों का कहना है कि छात्रा ने पूरे वर्ष कठिन परिश्रम किया और आधिकारिक उत्तर कुंजी के अनुसार उसके 720 में से 702 अंक बन रहे थे। इसके विपरीत जारी स्कोरकार्ड में उसे केवल 87 अंक दिए गए।
परिवार का आरोप है कि छात्रा की ओएमआर शीट में गड़बड़ी हुई है, जिसके कारण उसका परिणाम पूरी तरह बदल गया। छात्रा की मां मीरा पवार ने कहा कि उनके पास अपने दावे के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
देश के अन्य छात्रों में भी बढ़ी चिंता
इन दोनों मामलों के सामने आने के बाद कई अभिभावकों और विद्यार्थियों ने भी अपने परिणामों का पुनः मिलान शुरू कर दिया है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि कहीं तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटि हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित न हो।
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23 जुलाई की सुनवाई पर टिकी सभी की निगाहें
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ ने 23 जुलाई को सुनवाई तय की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय इस मामले में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी से क्या जवाब मांगता है और विद्यार्थियों की शिकायतों पर आगे क्या निर्देश जारी करता है।
– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट
