Devendra Fadnavis Speech Ajit Pawar (फोटो क्रेडिट-X)
Maharashtra Assembly Budget Session 2026: महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र आज एक अत्यंत भावुक क्षण का साक्षी बना। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में दिवंगत नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार को याद करते हुए एक हृदयस्पर्शी शोक प्रस्ताव पेश किया। भारी मन और रुंधे हुए गले से फडणवीस ने स्वीकार किया कि अजित पवार का जाना न केवल महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है, बल्कि उनके व्यक्तिगत जीवन में भी एक ऐसा शून्य पैदा कर गया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता। ‘दादा’ के नाम से लोकप्रिय अजित पवार की बगल वाली सीट आज खाली देख सदन में मौजूद हर विधायक की आंखें नम हो गईं।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में महाकवि भास के नाटक ‘स्वप्नवासवदत्तम्’ के एक सुभाषित का उल्लेख करते हुए मित्र के वियोग की पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अजितदादा जैसे सच्चे मित्र और सहयात्री को खोना राजनीति से परे एक व्यक्तिगत घाव है। विधानसभा में वर्षों तक साथ काम करने और सरकार चलाने के दौरान बने रिश्तों को याद करते हुए फडणवीस ने उन्हें एक ऐसा समर्पित लोकप्रतिनिधि बताया, जो सुबह से देर रात तक सदन की कार्यवाही में अडिग होकर बैठता था।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, “लकड़ी जलती है तो आग केवल शरीर को जलाती है, लेकिन मित्र का शोक हृदय और आत्मा को भी जला देता है।” उन्होंने साझा किया कि सदन में जब भी उनकी नजर बगल की सीट पर जाती है, उन्हें दादा की उपस्थिति का अहसास होता है। उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि उन्हें अपने इतने करीबी सहयोगी के लिए शोक प्रस्ताव पढ़ना पड़ेगा। फडणवीस के अनुसार, अजित पवार केवल एक नेता नहीं बल्कि एक मजबूत ढाल थे, जिन्होंने कठिन समय में हमेशा ठोस निर्णय लेने का साहस दिखाया।
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अजित पवार के प्रशासनिक कौशल और वित्तीय अनुशासन की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि दादा इस वर्ष अपना 12वां बजट पेश करने की तैयारी में थे। यदि नियति साथ देती, तो अगले वर्ष वे 13वां बजट पेश कर बैरिस्टर शेषराव वानखेड़े के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी कर लेते और संभवतः राज्य के इतिहास में सबसे अधिक बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री बनते। फडणवीस ने भारी मन से कहा, “आज उनके अचानक निधन के कारण यह जिम्मेदारी अब मुझ पर आ गई है, लेकिन उनकी कमी हर पल खलेगी।”
फडणवीस ने अजित पवार के निर्णय लेने की क्षमता का उदाहरण देते हुए ‘लाडकी बहिन’ योजना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब योजना के वित्तीय बोझ को लेकर चर्चाएं चल रही थीं, तब अजितदादा ने ही इसे मजबूती से मंत्रिमंडल के सामने रखा था। योजना की सफलता के बाद उनके द्वारा शुरू किया गया ‘गुलाबी जैकेट’ का ट्रेंड अब एक अमिट याद बन गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अजित दादा जैसे प्रभावशाली और दूरदर्शी नेतृत्व का जाना सही मायनों में एक युग का अंत है, और उनके द्वारा छोड़ी गई विरासत को आगे बढ़ाना अब उनकी जिम्मेदारी है।