अवैध खनन के खिलाफ टॉवर पर चढ़ा युवक, किसान ने जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में किया हाई वोल्टेज ड्रामा
Nashik Illegal Mining News: नासिक के वडालीभोई क्षेत्र में अवैध खदानों और क्रशरों से परेशान किसान चेतन शेवाले ने जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में मोबाइल टॉवर पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन किया।
- Written By: आंचल लोखंडे
Nashik Illegal Mining News: नासिक के वडालीभोई क्षेत्र में अवैध खदानों और क्रशरों से परेशान किसान चेतन शेवाले ने जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में मोबाइल टॉवर पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने फसल नुकसान, प्रदूषण और ब्लास्टिंग से घरों में दरारें पड़ने का आरोप लगाते हुए प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाया। (सोर्सः एआय जनरेटेड फोटो- सोशल मीडीया)
Nashik Mobile Tower Protest News: वडालीभोई शिवार में राजमार्ग से सटे खेतों से महज 100 मीटर की दूरी पर 10 से 12 अवैध खदानें और क्रशर धड़ल्ले से चल रहे हैं। इससे साल 2018 से ही स्थानीय किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बार-बार शिकायतें करने के बावजूद जिला प्रशासन द्वारा इस ओर आंखें मूंद लेने के कारण आखिरकार मंगलवार 26 मई को एक पीड़ित युवक चेतन शेवाले ने जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में स्थित मोबाइल टॉवर पर चढ़कर करीब 40 मिनट तक उग्र आंदोलन किया।
युवक के अचानक टॉवर पर चढ़ने से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को मौके पर बुलाया गया। आखिरकार जिलाधिकारी आयुष प्रसाद द्वारा युवक शेवाले को चर्चा के लिए बुलाने का आश्वासन दिए जाने के बाद वह नीचे उतरा, जिसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।
40 मिनट मची रही अफरा-तफरी
आंदोलनकारी युवक ने आरोप लगाया कि क्रशरों से उड़ने वाली धूल के प्रदूषण के कारण इलाके के 10 से 12 किसानों की फसलें पूरी तरह झुलस गई हैं। कृषि विभाग द्वारा किए गए निरीक्षण में भी 70 से 75 प्रतिशत फसल नुकसान की बात सामने आई है। इसके अलावा, खदानों में होने वाले भारी विस्फोटों (ब्लास्टिंग) के कारण स्थानीय घरों में दरारें आ गई हैं और कुओं का जलस्तर भी काफी नीचे चला गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि मंडल अधिकारी योगिता भोये ने मौके पर वास्तव में चल रही 9 अवैध खदानों को अपनी सरकारी रिपोर्ट में शेततले (कृषि तालाब) के रूप में दर्शाया है।
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धूल और धमाकों से किसान बर्बाद, रिपोर्ट में दिखाई हेराफेरी
इसके साथ ही, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आज तक इस क्षेत्र में वायु गुणवत्ता की कोई जांच ही नहीं की है। शेवाले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, बिना किसी आधिकारिक अनुमति के यहां लाखों ब्रास गौण खनिजों का अवैध उत्खनन किया गया है। यह सारी सामग्री कहां बेची गई, इसका हिसाब कौन देगा? यह मामला राजस्व मंत्री तक पहुंचने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। जब गरीब किसान पूरी तरह बर्बाद हो रहे हैं, तो प्रशासन मौन क्यों साधे बैठा है?
