कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स: IANS)
Delhi Blast Case Three Suspects Detained: दिल्ली में 10 नवंबर को लाल किले के पास कार ब्लास्ट में 13 लोगों की मौत के बाद कई राज्यों में जांच तेज कर दी गई है। इसी कड़ी में मुंबई पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर ब्लास्ट मामले के मुख्य आरोपी से जुड़े तीन व्यक्तियों को हिरासत में लिया है।
अधिकारियों के अनुसार, ये तीनों संदिग्ध सोशल मीडिया ऐप के जरिये आरोपी के संपर्क में थे। प्रारंभिक पूछताछ के बाद इन्हें आगे की जांच के लिए दिल्ली भेजा जा रहा है।
जांच अधिकारियों ने खुलासा किया कि हिरासत में लिए गए तीनों संदिग्ध उन्हीं आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों से आते हैं, जैसे इस मॉड्यूल के दो प्रमुख आरोपी डॉ. उमर मोहम्मद और डॉ. मुज़म्मिल। पुलिस की मानें तो यह मॉड्यूल बेहद संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम नेटवर्क चला रहा था, जिसमें एन्क्रिप्टेड चैट, हथियारों की सप्लाई और फंडिंग के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं।
जांच में पता चला है कि डॉ. उमर ने तीन महीने पहले सिग्नल ऐप पर एक विशेष कैरेक्टरों वाला एन्क्रिप्टेड ग्रुप बनाया था, ताकि किसी भी तरह की निगरानी से बचा जा सके। इस ग्रुप में मुज़म्मिल, आदिल राथर, मुज़फ्फर राथर और मौलवी इरफान अहमद वागे जुड़े हुए थे। यही ग्रुप आतंरिक बातचीत और ऑपरेशन का प्रमुख माध्यम था।
जांच को बड़ा मोड़ तब मिला जब डॉ. शाहीन शाहिद की कार से एक असॉल्ट राइफल और पिस्तौल बरामद की गई। माना जा रहा है कि ये हथियार इरफ़ान को उमर ने 2024 में सौंपे थे। शाहीन भी इन हथियारों को इरफान के कमरे में देख चुका था। जांच एजेंसियों को शक है कि मॉड्यूल को सबसे अधिक आर्थिक मदद शाहीन ने ही दी।
मॉड्यूल के भीतर एक निर्धारित पदानुक्रम भी सामने आया है उमर, मुज़म्मिल और शाहीन फंडिंग संभालते थे, जबकि इरफान की जिम्मेदारी कश्मीर के युवाओं की भर्ती थी। इरफान ने ही गिरफ्तार हुए दो युवकों आरिफ निसार डार उर्फ साहिल और यासिर उल अशरफ को नेटवर्क से जोड़ा था।
जांचकर्ताओं ने हथियारों के बार-बार स्थानांतरण के कई मामलों की पुष्टि की है। अक्टूबर 2023 में आदिल और उमर एक मस्जिद में इरफान से मिले थे, जहां वे एक बैग में छिपी राइफल लेकर पहुंचे। राइफल साफ करने के बाद वे वहां से निकल गए।
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नवंबर में आदिल फिर इरफ़ान के घर राइफल लेकर पहुंचा। उसी दिन शाहीन और मुज़म्मिल भी वहां मौजूद थे। राइफल पूरी रात वहीं रखी गई और अगले दिन आदिल उसे लेने लौटा। इससे साफ है कि मॉड्यूल लगातार सक्रिय और समन्वित तरीके से काम कर रहा था।
यह नेटवर्क फरीदाबाद के उस मॉड्यूल से भी जुड़ा पाया गया है जिसे 9 नवंबर को तब उजागर किया गया, जब पुलिस ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. मुज़म्मिल के किराए के कमरों से 2,900 किलो विस्फोटक एवं गोला-बारूद बरामद किया था।
10 नवंबर को लाल किले के पास विस्फोट हुई कार भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े दूसरे डॉक्टर उमर द्वारा चलाई जा रही थी। इसी घटना के बाद देशभर में कई जगह छापेमारी तेज हो गई है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)