Minister Narhari Zirwal Action (फोटो क्रेडिट-X)
Mantralaya Bribery Case 2026: महाराष्ट्र सरकार के अन्न व औषध प्रशासन विभाग में कथित भ्रष्टाचार और ‘सीक्रेट कोडवर्ड’ के जरिए रिश्वत लेने के मामले ने मंत्रालय में हड़कंप मचा दिया है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद मंत्री नरहरी झिरवाल ने तत्काल कड़ा रुख अपनाते हुए अपने निजी सचिव (PS) डॉ. रामदास गाडे को पद से कार्यमुक्त कर दिया है। एक स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए भ्रष्टाचार के आरोपों में डॉ. गाडे का नाम आने के बाद झिरवाल ‘एक्शन मोड’ में नजर आ रहे हैं। उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर डॉ. गाडे की सेवाएं तुरंत उनके मूल विभाग (कृषि व पशुपालन विभाग) में वापस भेजने के निर्देश दिए हैं।
यह कार्रवाई सोमवार, 16 फरवरी 2026 से प्रभावी मानी गई है। मंत्री झिरवाल के कार्यालय में फाइलों के निपटारे के लिए पेन से लाइन खींचकर रिश्वत की राशि तय करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले ने न केवल प्रशासनिक शुचिता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि मंत्रालय के भीतर चल रहे कथित भ्रष्टाचार के “नेक्सस” को भी उजागर किया है। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि वे पारदर्शी प्रशासन के पक्षधर हैं और जांच पूरी होने तक किसी भी संदिग्ध अधिकारी को उनके कार्यालय में जगह नहीं मिलेगी।
इस पूरे विवाद की जड़ एक मेडिकल दुकानदार निर्मल शर्मा द्वारा किया गया स्टिंग ऑपरेशन है। आरोप है कि मंत्री कार्यालय में रिश्वत के लिए अनोखे कोडवर्ड का इस्तेमाल होता था। वीडियो में दावा किया गया है कि फाइल पर पेन से एक लाइन मारने का मतलब 50 हजार रुपये और दो लाइन मारने का मतलब 1 लाख रुपये की रिश्वत तय करना था। शर्मा का आरोप है कि फ्रिज में पानी की बोतलें रखने के कारण उनका लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था, जिसकी अपील के दौरान उनसे डॉ. गाडे के कार्यालय में पैसों की मांग की गई।
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स्टिंग वीडियो के अनुसार, शिकायतकर्ता जब 13 फरवरी को सुनवाई के लिए पहुंचा, तो उसे डॉ. गाडे के कक्ष में बिठाया गया। वहां कार्यरत लिपिक राजेंद्र ढेरंगे ने कथित तौर पर 1 लाख 10 हजार रुपये की मांग की। वीडियो में लिपिक को यह कहते सुना जा सकता है कि 1 लाख रुपये ‘ऊपर के अधिकारियों’ के लिए हैं और 10 हजार रुपये उसके अपने। जब शर्मा ने रकम कम करने की विनती की, तो उन्हें 50 प्रतिशत की ‘छूट’ दी गई, जिसके बाद उन्होंने 53 हजार रुपये नकद और 2 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए।
नरहरी झिरवाल महाराष्ट्र की राजनीति में एक अनुभवी चेहरा हैं, और उनके विभाग में इस तरह के आरोपों से उनकी छवि पर भी असर पड़ रहा था। डॉ. गाडे को पद से हटाकर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि भ्रष्टाचार के प्रति उनकी नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है। हालांकि, विपक्षी दल अब इस मामले की एसीबी (ACB) जांच की मांग कर रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि ‘ऊपर के अधिकारी’ कौन हैं और क्या यह वसूली तंत्र लंबे समय से सक्रिय था। फिलहाल, सामान्य प्रशासन विभाग ने मंत्री के आदेशानुसार डॉ. गाडे को कार्यमुक्त करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है।