कांग्रेस ने महाराष्ट्र में बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की
Rohingya Migrants: कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से राज्य में बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों के स्पष्ट आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Rohingya Migrants:कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai Civic Polls: कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से राज्य में बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या प्रवासियों से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है। यह मांग फडणवीस के उस बयान के बाद की गई है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि महाराष्ट्र में अवैध प्रवासियों की सबसे अधिक संख्या की पहचान कर ली गई है।
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि यदि सरकार ने वास्तव में राज्य में रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी नागरिकों की सबसे अधिक संख्या की पहचान की है, तो उसे इसके स्पष्ट और प्रमाणिक आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए।
‘महायुति’ के घोषणापत्र का अनावरण
मुंबई महानगरपालिका चुनाव के लिए सत्तारूढ़ ‘महायुति’ के घोषणापत्र का अनावरण करते हुए फडणवीस ने कहा था, “हम मुंबई को बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं से मुक्त करेंगे। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की मदद से बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान के लिए एक एआई टूल विकसित किया जाएगा।”
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“सपनों का सौदागर”
सावंत ने मुख्यमंत्री पर हमला करते हुए उन्हें “सपनों का सौदागर” करार दिया और कहा कि वे वर्तमान की कड़वी वास्तविकताओं को नजरअंदाज कर भविष्य के सुनहरे सपने दिखाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के अधिकांश साक्षात्कार भविष्य की योजनाओं पर केंद्रित होते हैं, जबकि अतीत में किए गए वादों के क्रियान्वयन को लेकर बहुत कम जवाबदेही दिखाई देती है।
‘तारीख पर तारीख’
सावंत ने कहा, “ईस्टर्न फ्रीवे को 2017 में ठाणे से जोड़ने और उसी वर्ष मुंबई को बाढ़-मुक्त घोषित करने का वादा किया गया था, लेकिन ये दोनों आश्वासन आज तक पूरे नहीं हुए। मुख्यमंत्री द्वारा घोषित समयसीमाओं का शायद ही कभी पालन किया जाता है। ‘तारीख पर तारीख’ अब सरकार के कामकाज का प्रतीक बन गया है।”
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उन्होंने यह भी कहा कि 2019 से राज्य सरकार महाराष्ट्र को एक हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कई समयसीमाएं घोषित कर चुकी है, लेकिन राज्य अब भी उस लक्ष्य से काफी दूर है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
