Maharashtra Farmer Suicide Data प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
Maharashtra Farmer Suicide: महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र 2026 के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गृह मंत्रालय और राजस्व विभाग की ओर से ‘महाराष्ट्र कृषि एवं सामाजिक सुरक्षा रिपोर्ट 2024-2026’ पेश की। यह रिपोर्ट राज्य में बढ़ते कृषि संकट, विशेषकर विदर्भ और मराठवाड़ा के जिलों में किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं के सिलसिलेवार और आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है।
नीचे इस रिपोर्ट का विस्तृत विश्लेषणात्मक ब्यौरा दिया गया है।
मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 2024 में कुल 2,635 किसानों ने आत्महत्या की, जो 2023 (2,851) की तुलना में थोड़ी कम थी। हालांकि, 2025 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में ही 767 मामले दर्ज किए गए, जो चिंताजनक वृद्धि की ओर संकेत करते हैं। सरकार ने स्वीकार किया कि विदर्भ और मराठवाड़ा के कपास और सोयाबीन बेल्ट में संकट सबसे गहरा है।
रिपोर्ट में कृषि संकट के पीछे कर्ज का बोझ (Indebtedness), फसल की बर्बादी और निजी साहूकारों के उत्पीड़न को मुख्य कारण बताया गया है।
विदर्भ क्षेत्र: अमरावती डिवीजन में 2024 में सबसे अधिक 1,051 मौतें दर्ज की गईं।
मराठवाड़ा क्षेत्र: यहाँ 2024 में 948 मामले सामने आए। 2025 की पहली छमाही में यहाँ किसान आत्महत्या की दर में पिछले वर्ष की तुलना में 32% की वृद्धि देखी गई।
उत्तर और पश्चिम महाराष्ट्र: यहाँ नासिक (283) और पुणे (46) जैसे जिलों में आंकड़े तुलनात्मक रूप से कम हैं, लेकिन बागवानी फसलों (प्याज, अंगूर) के गिरते दामों ने यहाँ भी असंतोष पैदा किया है।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि 2025 में दर्ज कुल 767 मामलों में से केवल 373 परिवार ही सरकारी मुआवजे (1 लाख रुपये) के लिए पात्र पाए गए हैं। 200 आवेदनों को तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया गया, जबकि शेष की जांच जारी है। सरकार ने ‘नमो शेतकरी महासन्मान निधि’ और ‘लाडकी बहिन योजना’ के माध्यम से परिवारों को आर्थिक संबल देने का दावा किया है।
देवेंद्र फडणवीस और महायुति सरकार ने कृषि संकट से निपटने के लिए लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के विभिन्न कृषि पैकेजों और योजनाओं का रोडमैप तैयार किया है:
जलयुक्त शिवार 2.0: फडणवीस सरकार ने अपने फ्लैगशिप कार्यक्रम ‘जलयुक्त शिवार’ के दूसरे चरण को गति दी है, जिसका लक्ष्य राज्य के गांवों को सूखा मुक्त बनाना और सिंचाई की विकेंद्रीकृत व्यवस्था करना है।
ऋण माफी और प्रोत्साहन: ‘छत्रपति शिवाजी महाराज शेतकली सम्मान योजना’ के तहत लंबित लाभों को वितरित करने के लिए 5,975 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट प्रस्तावित किया गया है। नियमित कर्ज चुकाने वाले किसानों को 50,000 रुपये का प्रोत्साहन अनुदान भी दिया जा रहा है।
नमो शेतकरी महा-सम्मान निधि: पीएम-किसान योजना की तर्ज पर राज्य सरकार किसानों को सालाना 6,000 रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता दे रही है, जिससे कुल सहायता 12,000 रुपये हो जाती है।
सौर कृषि पंप योजना: बिजली की समस्या के समाधान के लिए बड़े पैमाने पर सब्सिडी वाले सोलर पंप वितरित किए जा रहे हैं ताकि किसान दिन में भी सिंचाई कर सकें।
सरकार ने जलवायु परिवर्तन और फसल पैटर्न की समीक्षा के लिए 30 अक्टूबर 2025 को एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति कपास और सोयाबीन के विकल्प और नियंत्रित खेती (Controlled Farming) पर सुझाव देगी। हालांकि, विपक्षी दल और किसान संगठनों का आरोप है कि ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (MSP) और ‘फसल बीमा’ (PMFBY) के दावों के भुगतान में हो रही देरी संकट को कम नहीं होने दे रही है।