महाराष्ट्र में अब गैर-किसान नहीं खरीद पाएंगे खेत, चंद्रशेखर बावनकुले के इस निर्णय से भूमाफियाओं में हडकंप

Agricultural Land Buying Rules: महाराष्ट्र में अब गैर-किसान नहीं खरीद पाएंगे खेती की जमीन। चंद्रशेखर बावनकुले के इस बड़े फैसले से भूमाफियाओं में मचा हड़कंप। जानें क्या है नया नियम और इसके मायने।
chandrashekhar bawankule decision on agricultural land buying rules maharashtra
चंद्रशेखर बावनकुले (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Chandrashekhar Bawankule Decision On Agricultural Land Buying: महाराष्ट्र में जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और बेहद कड़ा फैसला लिया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा में घोषणा की है कि अब राज्य में कृषि भूमि खरीदने के लिए व्यक्ति का किसान होना अनिवार्य होगा।

यदि आपके पास किसान होने का वैध प्रमाण नहीं है, तो आप चाहकर भी महाराष्ट्र के किसी भी हिस्से में जमीन की रजिस्ट्री नहीं करा पाएंगे। सरकार के इस कदम को भू-माफियाओं और फर्जी तरीके से जमीन हड़पने वालों के खिलाफ एक बड़े सर्जिकल स्ट्राइक के रूप में देखा जा रहा है।

धुले के जमीन घोटाले से खुला राज

इस कड़े फैसले की पृष्ठभूमि धुले जिले के एक बड़े जमीन घोटाले से जुड़ी है। धुले के विधायक अनुप अग्रवाल ने विधानसभा में वडजाई, पिंपरी और नरवहाल क्षेत्रों में हुए जमीन घोटालों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि बाहरी राज्यों के लोग और गैर-किसान लोग नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से जमीनें खरीद रहे हैं। इसी सवाल का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री ने पूरे राज्य के लिए नई और सख्त व्यवस्था लागू करने का ऐलान किया।

अब डिजिटल मैपिंग से पकड़े जाएंगे बोगस किसान

मंत्री बावनकुले ने बताया कि अब केवल कागजों पर किसान बता देना काफी नहीं होगा। सरकार सेटलमेंट कमीश्नर के माध्यम से पूरे राज्य में जमीनों की मैपिंग कर रही है और एक आधुनिक प्रणाली विकसित की जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत राज्य के सभी स्टैंप अधिकारियों को अब सेटलमेंट कमीश्नर के डेटाबेस का सीधा एक्सेस दे दिया गया है।

जैसे ही कोई व्यक्ति जमीन की रजिस्ट्री के लिए आएगा, अधिकारी तुरंत चेक कर सकेंगे कि उस व्यक्ति के पास राज्य में कहीं और जमीन है या नहीं और क्या वह वास्तव में किसान है। यदि कोई बाहरी व्यक्ति या गैर-किसान संदेहास्पद पाया जाता है, तो उसकी रजिस्ट्री तुरंत रोक दी जाएगी और उसकी गहन जांच की जाएगी।

धुले घोटाले की पुलिस जांच और फर्जी सिक्कों का खेल

धुले में हुए घोटाले की गंभीरता को देखते हुए राजस्व मंत्री ने विभागीय आयुक्त प्रवीण गेडाम के नेतृत्व में एक स्वतंत्र जांच टीम गठित करने का आदेश दिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि दो मामलों में खरीदारों के पास किसान होने का कोई सबूत नहीं था। विधायक अग्रवाल ने सदन में तहसीलदार के सिक्कों वाले जो दस्तावेज पेश किए, उनके भी बनावट होने की आशंका है। बावनकुले ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की जांच अब धुले पुलिस अधीक्षक करेंगे और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।

2010 की अवैध वारीस प्रविष्टियां होंगी रद्द

जमीन के पुराने विवादों को सुलझाते हुए मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि धुले की विवादित जमीन पहले जयप्रकाश गृहनिर्माण संस्था के 44 सदस्यों के नाम पर थी। लेकिन 2010 में मूल मालिकों के उत्तराधिकारियों ने राजस्व अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर अवैध रूप से अपना नाम दर्ज कराया और जमीन दूसरों को बेच दी। सरकार ने अब एस.एल.आर. से विशेष अनुमति लेकर इन 2010 की गलत प्रविष्टियों को रद्द करने और मूल 44 सदस्यों के हक बहाल करने का निर्णय लिया है।

बाहरी राज्यों के खरीदारों पर विशेष नजर

सिंधुदुर्ग जिले के दोडामार्ग और मोपा हवाई अड्डे के पास बाहरी लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर जमीन खरीदे जाने का मुद्दा जयंत पाटील ने भी उठाया था। राजस्व मंत्री ने आश्वस्त किया कि नई तकनीक और डेटाबेस के माध्यम से अब यह पता लगाना आसान होगा कि कौन बाहरी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन कर रहा है। इस नई प्रणाली से बोगस किसान बनकर जमीनें हड़पने वाली पूरी चेन पर लगाम लग जाएगी।

सरकार के इस सख्त रुख से साफ है कि अब महाराष्ट्र की धरती पर केवल असली किसानों का ही हक सुरक्षित रहेगा और हेरफेर करने वालों को जेल की हवा खानी पड़ेगी।

Navbharat Live
navbharatlive.com