Borivali Jeweller Lawrence Bishnoi Gang Extortion (फोटो क्रेडिट-X)
Lawrence Bishnoi Gang Extortion: मुंबई के बोरीवली इलाके में एक बार फिर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर जबरन वसूली (Extortion) का सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक 45 वर्षीय ज्वेलरी व्यापारी को अंतरराष्ट्रीय व्हाट्सएप नंबर से संदेश भेजकर 30 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई है। धमकी देने वाले ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि रकम नहीं दी गई, तो व्यापारी का हश्र भी पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी जैसा ही किया जाएगा।
इस घटना के बाद से बोरीवली के व्यापारिक जगत में दहशत का माहौल है। पीड़ित व्यापारी की शिकायत पर बोरीवली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि यह वाकई किसी गैंग की करतूत है या फिर कोई स्थानीय अपराधी बिश्नोई गैंग के नाम का खौफ इस्तेमाल कर रहा है।
व्यापारी को भेजे गए व्हाट्सएप मैसेज में बेहद डरावनी भाषा का इस्तेमाल किया गया है। संदेश में लिखा था, “लॉरेंस बिश्नोई गैंग को 30 लाख फिरौती तुमको देना है। अगर मैनेज नहीं किया तो जैसे बाबा सिद्दीकी को मारे हैं, वैसे ही तुमको भी मारेंगे। 24 घंटे के अंदर पैसे रेडी कर देना।” धमकी यहीं नहीं रुकी, आरोपी ने आगे लिखा कि यदि पैसे नहीं मिले तो व्यापारी या उसके परिवार को ‘ठोक’ दिया जाएगा। मैसेज के अंत में ‘लॉरेंस बिश्नोई गिरोह अमेरिका’ लिखा हुआ था, जिससे पुलिस को संदेह है कि यह कॉल इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) के जरिए की गई हो सकती है।
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धमकी देने वाले ने व्यापारी के मन में डर पैदा करने के लिए बाबा सिद्दीकी की हत्या का बार-बार जिक्र किया। कॉल पर आरोपी ने कहा कि 24 घंटे के भीतर पैसों का इंतजाम हो जाना चाहिए। जब व्यापारी ने घबराहट दिखाई, तो आरोपी ने अमाउंट कम करने का नाटक करते हुए कहा, “कम से कम 10 लाख तो देने ही होंगे, नहीं तो गोली खाने के लिए रेडी रहना।” इस सीधे हमले ने पुलिस प्रशासन को भी अलर्ट कर दिया है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में मुंबई के कई व्यापारियों को इसी तरह के अंतरराष्ट्रीय नंबरों से धमकियां मिल रही हैं।
व्यापारी की शिकायत मिलने के बाद बोरीवली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(5) के तहत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जिस अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबर से मैसेज आया है, उसकी कॉल डिटेल रिपोर्ट (CDR) निकाली जा रही है। मुंबई पुलिस की साइबर सेल और एंटी-एक्सटॉर्शन सेल (AEC) को भी इस जांच में शामिल किया गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस नंबर का लोकेशन वास्तव में विदेश में है या किसी वीपीएन (VPN) के जरिए पुलिस को गुमराह किया जा रहा है।