
Borivali Merchant Trading Scam 3 Arrest (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Borivali Merchant Trading Scam: डिजिटल निवेश के नाम पर होने वाले साइबर अपराध अब और भी शातिर होते जा रहे हैं। मुंबई की उत्तर साइबर पुलिस ने एक ऐसे ही गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने पुणे में बैठकर मुंबई के एक हीरा व्यापारी को अपनी साजिश का शिकार बनाया। बोरीवली के रहने वाले 43 वर्षीय व्यवसायी से व्हाट्सएप ग्रुप और ‘TMGPLUS’ नामक एक फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन के जरिए 48.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुणे से तीन आरोपियों, अमर बापू शिंदे, प्रशांत सुनील कादव और प्रणिल संजय राठौड़ को गिरफ्तार किया है। ये तीनों शिक्षित युवक महज कमीशन के लालच में इस बड़े साइबर सिंडिकेट का हिस्सा बन गए थे।
पुलिस जांच में पता चला है कि इस ठगी की शुरुआत एक अनजान कॉल से हुई थी, जिसने पीड़ित का भरोसा जीतकर उसे ‘डेली रिकमेंडेशन्स 602’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल किया था।
ठगी की यह कहानी अक्टूबर 2025 में शुरू हुई, जब ‘रिया’ नामक एक महिला ने खुद को सेबी (SEBI) पंजीकृत ब्रोकरों से जुड़ा बताकर पीड़ित से संपर्क किया। पीड़ित को पहले एक सामान्य ग्रुप और फिर उसकी मर्जी के बिना एक ‘वीआईपी स्टडी ग्रुप’ में डाल दिया गया। यहाँ फर्जी स्क्रीनशॉट्स और भारी मुनाफे के लालच भरे मैसेज साझा किए जाते थे। जालसाजों ने पीड़ित को ‘TMGPLUS’ ऐप डाउनलोड करवाया, जो दिखने में बिल्कुल असली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसा था। विश्वास जीतने के लिए शुरुआत में उसे छोटी रकम निकालने की अनुमति दी गई, जिससे प्रेरित होकर उसने 18 नवंबर से 12 दिसंबर के बीच 48.50 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए।
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जब पीड़ित ने अपना मूल निवेश और दिखाया गया फर्जी मुनाफा निकालने की कोशिश की, तो जालसाजों ने एक नया पैंतरा चला। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित के पैसे ‘आईपीओ आवंटन’ प्रक्रिया के कारण फ्रीज हो गए हैं। इन पैसों को अनलॉक करने के लिए आरोपियों ने 50 लाख रुपये की और मांग की। जब व्यवसायी ने पैसे देने से इनकार कर दिया और उसे संपर्क मिलना बंद हो गया, तब उसे एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुका है। इसके बाद उसने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
उत्तर साइबर पुलिस के इंस्पेक्टर किरण अहेर और एपीआई सुदर्शन पाटिल की टीम ने बैंक लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड खंगालते हुए पुणे के अंबेगांव इलाके में छापेमारी की। गिरफ्तार आरोपियों में से शिंदे एक वित्तीय कंपनी में काम कर चुका है, जिसने अपने बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम घुमाने के लिए किया। कादव बिचौलिए का काम करता था, जबकि राठौड़ खातों से पैसे निकालकर मुख्य सरगना तक पहुँचाता था। पुलिस ने ‘सनएनर्जियर सॉल्यूशंस’ के नाम पर पंजीकृत एक खाते से 33 लाख रुपये के लेनदेन का पता लगाया है।
मुंबई पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनजान व्हाट्सएप ग्रुपों द्वारा दी जाने वाली स्टॉक टिप्स और अनाधिकृत ट्रेडिंग ऐप्स से दूर रहें। किसी भी निवेश से पहले संबंधित ब्रोकर या ऐप की सेबी (SEBI) से सत्यता की जांच जरूर करें।






