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POP गणेश मूर्तियों पर बॉम्बे हाई कोर्ट सख्त, कहा- प्राकृतिक जलस्रोतों को हो रहा नुकसान

Bombay High Court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने पीओपी गणेश मूर्तियों के विसर्जन पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि इससे जलस्रोतों को नुकसान हो रहा है, मूर्तिकारों को खुद इसे बंद करना चाहिए।

  • Written By: रूपम सिंह
Updated On: Jul 18, 2026 | 12:35 PM

बॉम्बे हाई कोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)

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Bombay High Court POP Ganesh Idols: राज्य सरकार ने पिछले साल 6 फीट से अधिक ऊंचाई वाली प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) गणेश मूर्तियों के प्राकृतिक जलस्रोतों में विसर्जन की अनुमति देने वाली नीति जारी की थी। हालांकि इस नीति को जारी रखने से जलस्रोतों को और अधिक नुकसान पहुंचेगा, ऐसी टिप्पणी बॉम्बे हाई कोर्ट ने की। अदालत ने कहा कि मूर्तिकारों के पास इस मुद्दे पर विचार करने के लिए एक साल का समय था। राज्य सरकार की यह नीति मार्च महीने में समाप्त हो चुकी है।

हाई कोर्ट ने कहा कि पीओपी से प्राकृतिक जलस्रोतों को नुकसान पहुंचता है। सीपीसीबी की गाइडलाइंस होने के बावजूद मूर्तिकार पर्यावरण अनुकूल गणेश मूर्तियों या अन्य विकल्पों पर विचार क्यों नहीं कर रहे हैं? मूर्तिकारों की ओर से एडवोकेट उदय वारुंजीकर ने कहा कि मूर्तिकार भी पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के पक्ष में हैं, लेकिन यह बदलाव एक रात में संभव नहीं है।

‘गणेशोत्सव में सिर्फ 70 दिन बाकी वाली दलील पर कोर्ट सख्त : मूर्तिकार संघ की ओर से कहा गया कि गणेशोत्सव में अब केवल 70 दिन बचे हैं। इस पर अदालत ने कहा कि हमें यह मत बताइए कि कितने दिन बाकी है। सरकार की नीति मार्च में समाप्त हो चुकी है और आपके पास भी पिछले एक साल का समय था, इसलिए आपको खुद पीओपी मूर्तियां बनाना बंद कर देना चाहिए।

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मूर्तिकारों ने जताई व्यावहारिक कठिनाइयां

मूर्तिकारों की ओर से अधिवक्ता उदय वारुंजीकर ने अदालत को बताया कि मूर्तिकार भी पर्यावरण संरक्षण के पक्षधर हैं, लेकिन पारंपरिक पीओपी मूर्तियों से पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों की ओर बदलाव एक दिन में संभव नहीं है। इसके लिए समय और आवश्यक संसाधनों की जरूरत होगी।

पर्यावरण संरक्षण पर जोर

हाई कोर्ट ने दोहराया कि प्राकृतिक जलस्रोतों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल गणेश मूर्तियों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है, ताकि धार्मिक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जा सके।

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Published On: Jul 18, 2026 | 12:35 PM

Topics:  

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