महाराष्ट्र में 6.11 लाख हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य, नदी जोड़ परियोजनाओं पर फडणवीस की सख्त समीक्षा

Maharashtra River Linking Projects: सीएम फडणवीस ने महाराष्ट्र की बड़ी नदी जोड़ और सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा की। वैनगंगा-नलगंगा परियोजना से 8 जिलों की 6.11 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
CM Devendra Fadnavis approves major financial provisions for river-linking projects in Maharashtra and orders a comprehensive survey to boost MSMEs.
सिंचाई का लक्ष्य (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Irrigation Project Maharashtra Devendra Fadnavis Review: राज्य सरकार ने सिंचाई परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रावधान किया है। इन परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करने के लिए जल संसाधन विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे। यह निर्देश मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में नारपार गिरणा नदी जोड़ परियोजना, दमनगंगा एकदरे-गोदावरी, दमनगंगा वैतरणा गोदावरी, कोंकण उल्हास वैतरणा तथा गोदावरी बेसिन नदी जोड़ परियोजनाओं की समीक्षा की गई।

बैठक में जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, मंत्री गिरीश महाजन, विभाग के प्रधान सचिव एकनाथ डवले, मुख्यमंत्री के जल मामलों के सलाहकार श्रीराम वेदरे, प्रधान सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। वैनगंगा नलगंगा नदी जोड़ परियोजना के तहत गोदावरी बेसिन की वैनगंगा उप-बेसिन का 63.74 टीएमसी पानी बुलढाना जिले की नलगंगा उप-बेसिन की ओर मोड़ने का प्रस्ताव है। इस परियोजना से 6,11,150 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

इसका लाभ भंडारा, नागपुर, वर्धा, अमरावती, यवतमाल, अकोला, बुलढाना और वाशिम जिलों को मिलेगा। केंद्र सरकार ने किसान आत्महत्या प्रभावित जिलों में बलीराजा जलसंजीवनी योजना शुरू की है।

एमएसएमई क्षेत्र के लिए बनेगा नया इकोसिस्टम

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य में आ रहे बड़े निवेश को उद्योगों और रोजगार में बदलने के लिए निवेश क्षमता वाले क्षेत्रों की पहचान कर व्यापक नीतियां बनाई जाएंगी। उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) का विस्तृत सर्वेक्षण कर इस क्षेत्र के लिए मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए।

वर्षा निवास पर उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि नई औद्योगिक नीतियां तैयार करते समय विशेषज्ञों और सफल उद्यमियों से चर्चा की जाए। उन्होंने कहा कि नीतियों के जरिए उद्योगों की कमियां दूर हों और मौजूदा औद्योगिक नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

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