‘विधायकी के लिए पार्टी बेचने वाला नालायक नहीं हूं’, शिवसेना में विलय की खबरों पर बच्चू कडू का करारा जवाब
Bachchu Kadu on Shiv Sena Merger: प्रहार जनशक्ति पार्टी के शिवसेना में विलय की खबरों पर बच्चू कडू ने दी सफाई। कहा- एक विधायक पद के लिए पार्टी खत्म नहीं करूंगा।
- Written By: अनिल सिंह
शिवसेना में पार्टी के विलय पर बच्चू कडू ने तोड़ी चुप्पी (फोटो क्रेडिट-X)
Bachchu Kadu Statementon Shiv Sena Merger: महाराष्ट्र की राजनीति में 2025 के विधानसभा चुनावों के बाद समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री और एकनाथ शिंदे के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद अब छोटे दलों के अस्तित्व को लेकर नई बहस छिड़ गई है। पिछले कुछ दिनों से प्रहार जनशक्ति पार्टी के प्रमुख बच्चू कडू और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच विलय की अटकलें काफी तेज थीं। इन चर्चाओं ने महायुति गठबंधन के भीतर नई हलचल पैदा कर दी थी, लेकिन अब बच्चू कडू ने स्वयं सामने आकर इन सभी दावों पर विराम लगा दिया है।
बच्चू कडू ने स्पष्ट किया कि विलय का प्रस्ताव उन्हें केवल मीडिया के माध्यम से ही पता चला है। उन्होंने बताया कि हालांकि मंत्री उदय सामंत के साथ उनकी फोन पर संक्षिप्त बातचीत हुई थी और एक ओझरती मुलाकात भी हुई थी, लेकिन उस चर्चा में किसी भी तरह की स्पष्टता नहीं थी। कडू के अनुसार, पार्टी विलय जैसे बड़े और संवेदनशील फैसले के लिए बहुत अधिक गहन चर्चा और वैचारिक तालमेल की आवश्यकता होती है, जो अभी तक धरातल पर नहीं हुई है।
“विधायक पद के लिए समझौता नहीं”
अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए बच्चू कडू ने कड़े शब्दों में कहा, “मैं एक विधायक पद (MLC) के लिए शिवसेना में चला जाऊं, इतना नालायक बच्चू कडू नहीं है”। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रहार केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक लाख सदस्यों और लाखों दिव्यांगों की उम्मीदों से जुड़ी एक विचारधारा है। उन्होंने इस बात पर भी गहरा दुख जताया कि वर्तमान राजनीति केवल धर्म और सत्ता के समीकरणों पर चल रही है, जहाँ जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है।
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संघर्ष और प्रहार का स्वतंत्र अस्तित्व
बच्चू कडू ने अपनी राजनीतिक जड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि वह मूल रूप से एक पुराने शिवसैनिक ही रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपनी स्वतंत्र पहचान ‘प्रहार’ के रूप में खड़ी की है। उन्होंने याद दिलाया कि 2025 के विधानसभा चुनाव के समय भी उनके पास गठबंधन के विकल्प थे, लेकिन उन्होंने स्वाभिमान को प्राथमिकता दी। उनका संकेत साफ था कि वह अपनी मेहनत से खड़ी की गई संगठन की बलि किसी पद के लिए नहीं देंगे, चाहे राज्य की कमान अब किसी के भी हाथ में हो।
भविष्य की अनिश्चितता और MLC उम्मीदवारी
विधान परिषद के आगामी चुनाव और उम्मीदवारी पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए आवश्यक कागजात तो उनके पास हमेशा तैयार रहते हैं, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से उन्हें कोई आधिकारिक आमंत्रण नहीं मिला है। हालांकि उन्होंने भविष्य की संभावनाओं को पूरी तरह से नकारा नहीं है, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना सम्मानजनक और ठोस चर्चा के वे कोई भी बड़ा कदम नहीं उठाएंगे। कडू का यह रुख फडणवीस सरकार के लिए भविष्य में सहयोगी दलों के समन्वय की एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।
