पहले मंत्री बनाओ, फिर करेंगे विलय, बच्चू कडू की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शिंदे के ऑफर पर दिया नया फॉर्मूला

Bachchu Kadu Shiv Sena Offer: एकनाथ शिंदे ने बच्चू कडू को MLC और मंत्री पद का ऑफर दिया। प्रहार पार्टी के विलय की शर्त पर कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल।
Bachchu Kadu MLC Offer Eknath Shinde
Bachchu Kadu MLC Offer Eknath Shinde (फोटो क्रेडिट-X)
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Bachchu Kadu MLC Offer Eknath Shinde: महाराष्ट्र की राजनीति में आगामी विधान परिषद चुनाव को लेकर बिसात बिछनी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विदर्भ के फायरब्रांड नेता बच्चू कडू को एक बड़ा राजनीतिक ऑफर दिया है, जिससे राज्य के सियासी समीकरण बदल सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, शिंदे की शिवसेना ने बच्चू कडू को विधान परिषद (MLC) भेजने और अगले 6 महीनों के भीतर मंत्री पद देने का वादा किया है। हालांकि, इस 'पुनर्वास' पैकेज के साथ एक कड़ा नियम भी जुड़ा है—बच्चू कडू को अपनी प्रहार जनशक्ति पार्टी का पूर्ण विलय शिवसेना में करना होगा।

वर्तमान में एकनाथ शिंदे के पास 57 विधायकों का समर्थन है। विधान परिषद चुनाव के लिए प्रति उम्मीदवार 28 वोटों का कोटा आवश्यक है, जिसका अर्थ है कि शिंदे की शिवसेना आसानी से दो सीटें जीत सकती है। पहली सीट पर नीलम गोऱ्हे का नाम लगभग निश्चित माना जा रहा है, जबकि दूसरी सीट के लिए बच्चू कडू को मुख्य दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।

उदय सामंत के साथ हुई गुप्त बैठक

हाल ही में बच्चू कडू और शिवसेना के वरिष्ठ नेता उदय सामंत के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में विलय की शर्तों और भविष्य की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। एकनाथ शिंदे जानते हैं कि विदर्भ में प्रहार पार्टी का नेटवर्क बहुत मजबूत है। भले ही 'प्रहार' राज्य स्तर पर बहुत बड़ा उलटफेर न कर सके, लेकिन उसके जमीनी कार्यकर्ताओं का जाला शिवसेना को आने वाले विधानसभा चुनावों में बड़ी बढ़त दिला सकता है।

कार्यकर्ताओं का 'वेट एंड वॉच' रुख

बच्चू कडू ने इस प्रस्ताव पर अपने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से राय मांगी है। पार्टी के भीतर से एक दिलचस्प प्रतिक्रिया सामने आई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि मंत्री पद 6 महीने बाद मिलने वाला है, तो अभी से पार्टी के विलय की जल्दबाजी क्यों? पदाधिकारियों ने सुझाव दिया है कि "बच्चू कडू व्यक्तिगत रूप से शिवसेना में शामिल होकर MLC की सीट ले सकते हैं, लेकिन प्रहार पार्टी का अस्तित्व तब तक बनाए रखा जाए जब तक मंत्री पद की शपथ न हो जाए।"

अब गेंद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पाले में है। क्या वह कार्यकर्ताओं की इस 'शर्त' को मानेंगे या बच्चू कडू को MLC बनने के लिए तुरंत अपनी पार्टी का विसर्जन करना होगा? विदर्भ की राजनीति और शिंदे की ताकत के लिहाज से यह फैसला बेहद निर्णायक होने वाला है।

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