नागपुर विधान परिषद चुनाव में क्रॉस वोटिंग का खौफ! सांसद बर्वे का दावा-हमारे संपर्क में हैं कई भाजपा नगरसेवक
Nagpur MLC Election: नागपुर विधान परिषद चुनाव से दो दिन पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस-मविआ ने क्रॉस वोटिंग का दावा किया है, जबकि भाजपा अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर विधान परिषद, नगरसेवक,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur MLC Election Cross Voting: नागपुर विधान परिषद की वोटिंग को अब केवल 2 दिन ही शेष रह गए हैं और दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। दो दिन पूर्व भाजपा के उम्मीदवार राजीव पोतदार ने प्रेस परिषद में दावा किया था कि उनकी जीत सुनिश्चित है और नगरसेवक आचार संहित की छुट्टी होने के चलते अपने खर्च पर गोवा व अन्य पर्यटन स्थलों की सैर पर गए हैं।
अब कांग्रेस-मविआ की ओर से सांसद श्याम बर्वे ने पलटवार करते हुए सनसनीखेज दावा किया कि भाजपा के अनेक नगरसेवक उनके संपर्क में हैं। बीजेपी को यह एहसास हो चुका था, इसलिए क्रॉस वोटिंग के भय से उसने अपने नगरसेवकों को बाहर भेज दिया। उन्होंने प्रेस परिषद में पूरी जिम्मेदारी से दावा किया कि इस चुनाव में जमकर क्रॉस वोटिंग होने वाली है।
इस अवसर पर मविआ के घटक दलों के नेताओं ने उपस्थित रहकर अपनी एकजुटता का भी प्रदर्शन किया, प्रेस परिषद में उम्मीदवार अतुल लोंढे, पूर्व मंत्री सुनील केदार, राजेन्द्र मूलक, पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख, कांग्रेस शहर अध्यक्ष प्रफुल गुडधे, पूर्व जिप उपाध्यक्ष कुंदा राऊत, अवंतिका लेकुरवाले, जिलाध्यक्ष अश्विन बैस सहित अन्य नेता उपस्थित थे।
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उम्मीदवारों के बीच हो खुली बहस : देशमुख
पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने दोनों पक्षों के उम्मीदवारों की सार्वजनिक मंच पर बहस आयोजित करने की चुनौती दी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार उच्च शिक्षित हैं और उन्हें 3 भाषाओं का अच्छा ज्ञान है।
उन्हें स्थानीय समस्याओं की भी गहरी समझ है। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी सामाजिक संस्था के माध्यम से दोनों उम्मीदवारों को एक मंच पर बुलाया जाए, जहां वे स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं की समस्याओं के समाधान की अपनी योजनाएं प्रस्तुत करें और नागरिकों के सवालों का जवाब दें।
OBC विरोधी है बीजेपी : गुडधे
शहर अध्यक्ष गुडधे ने आरोप लगाया कि बीजेपी ओबीसी विरोधी है। उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान में जनगणना की प्रक्रिया चल रही है। केंद्र सरकार ने जातिनिहाय जनगणना की घोषणा की थी लेकिन जनगणना प्रपत्र में एससी-एसटी के लिए तो अलग कालम हैं लेकिन ओबीसी वर्ग सेपरेट उल्लेख तक नहीं है। भाजपा का सबसे बड़ा मतदाता ओबीसी समाज है। फिर भी उसे विकास की मुख्यधारा से दूर रखने का षड्यंत्र किया जा रहा है।
दबाव में है बीजेपी
बर्वे ने दावा किया कि सभी सरकारी तंत्रों का उपयोग करने के बावजूद बीजेपी इस चुनाव में दबाव में दिखाई दे रही है। पहले उनकी ओर से प्रयास किया गया कि चुनाव निर्विरोध हो लेकिन मविआ ने अपना उम्मीदवार मैदान में उतार दिया, उन्होंने कहा कि हम निश्चिंत हैं और अपने नगरसेवकों पर हमें भरोसा है। इसलिए अपने किसी भी नगरसेवक को कहीं नहीं भेजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान कर्जमाफी, ओबीसी जनगणना, पेपर लीक और विकास के वादों को पूरा करने में भाजपा विफल रही है।
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इससे उसके ही नगरसेवकों में नाराजगी बढ़ी है। स्थानीय नागरिकों के सवालों का जवाब देने में उन्हें कठिनाई हो रही है और इसी नाराजगी के मतदान में सामने आने के डर से नगरसेवकों को एक स्थान पर रोककर रखा गया है। लोंढे ने आरोप लगाया कि जब जिला परिषद में महाविकास आघाडी की सत्ता थी, तब जिले में अनेक विकास योजनाएं संचालित हो रही थी लेकिन कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन योजनाओं को बंद कर दिया गया।
