Devendra Fadnavis And Aditya Thackeray (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Aaditya Thackeray On Climate Week: शिवसेना (UBT) नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा आयोजित ‘मुंबई जलवायु सप्ताह’ को महज एक दिखावा करार देते हुए सत्ता पक्ष पर तीखा हमला बोला है। ठाकरे ने सरकार की पर्यावरण नीतियों को “मीठी बातें” और “छलावा” बताते हुए आरोप लगाया कि एक तरफ वैश्विक मंचों पर जलवायु परिवर्तन की चर्चा की जा रही है, तो दूसरी तरफ धरातल पर जंगलों और पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करने की योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न परियोजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि सरकार का असली एजेंडा पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि उसे नष्ट करना है।
आदित्य ठाकरे का यह बयान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा जलवायु शिखर सम्मेलन के उद्घाटन के ठीक बाद आया है, जिसमें मुंबई को ‘क्लाइमेट फाइनेंस’ के वैश्विक केंद्र के रूप में पेश करने की बात कही गई थी। ठाकरे ने सरकार द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों (MoU) और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर्विरोध को उजागर करते हुए दावा किया कि तकनीकी शब्दावली और शानदार भाषणों के पीछे अंधाधुंध शहरीकरण और वनों की कटाई छिपी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करती, तब तक ऐसे सम्मेलनों का कोई लाभ नहीं होगा।
While all the sweet talking, formal MoUs and government chatter can happen at the @Mumbai_Climate where global agencies and partners have been invited: • The Great Nicobar Project that will destroy an entire local ecosystem has been cleared by the NGT- which supposedly is… — Aaditya Thackeray (@AUThackeray) February 18, 2026
आदित्य ठाकरे ने ‘X’ पर अपनी पोस्ट में कई परियोजनाओं का जिक्र किया जो उनके अनुसार पर्यावरण के लिए घातक हैं। उन्होंने ग्रेट निकोबार परियोजना को मंजूरी दिए जाने पर सवाल उठाए और कहा कि राष्ट्रीय वन्यजीव परिषद ने स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करने का मार्ग प्रशस्त किया है। इसके अलावा, उन्होंने नागपुर के अजनी वन में हजारों पुराने पेड़ों की कटाई और अरावली पर्वत श्रृंखला पर मंडराते खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया। ठाकरे ने आरोप लगाया कि ताडोबा और घोडाज़ारी जैसे बाघ अभयारण्यों के क्षेत्रों में खनन की अनुमति देना वन्यजीवों के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ करना है।
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ठाकरे ने मुंबई में बीएमसी (BMC) द्वारा 45,000 मैंग्रोव पेड़ों को काटने की योजना पर भी निशाना साधा। उन्होंने सरकार की ‘क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण’ (Compensatory Afforestation) नीति पर तंज कसते हुए कहा कि मुंबई के पेड़ काटकर चंद्रपुर में पौधे लगाने का क्या तर्क है, जहां खुद खदानें खोली जा रही हैं। उन्होंने कटाक्ष किया कि शायद सरकार काटे गए पेड़ों की भरपाई किसी और ग्रह पर करने की सोच रही है। उनके अनुसार, शहरों में बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए नगर निगमों द्वारा वनों की अंधाधुंध कटाई की अनुमति दी जा रही है, जो भविष्य में ‘शहरी ताप’ (Urban Heat) की समस्या को और गंभीर बनाएगा।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई जलवायु सप्ताह के दौरान शहर की लचीली (Resilient) छवि को प्रस्तुत किया। उन्होंने वैश्विक संस्थानों से अपील की कि वे उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए टिकाऊ अवसंरचना मॉडल विकसित करने में मुंबई के साथ साझेदारी करें। फडणवीस ने स्वीकार किया कि मुंबई पर जलवायु परिवर्तन का असर वास्तविक है; अत्यधिक बारिश और भीषण लू से केवल आंकड़े प्रभावित नहीं होते, बल्कि ट्रेनें रुकती हैं और गरीबों की आजीविका पर संकट आता है। उन्होंने इस शिखर सम्मेलन को ‘ग्लोबल साउथ’ को सशक्त बनाने की दिशा में भारत का पहला और महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।