Building Dispute Near INS Shikra (फोटो क्रेडिट-X)
Building Dispute Near INS Shikra: दक्षिण मुंबई के कोलाबा स्थित भारतीय नौसेना के अत्यंत संवेदनशील बेस आईएनएस शिकरा (INS Shikra) के पास बन रही एक 23 मंजिला इमारत को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री की खंडपीठ ने इस मामले में नौसेना के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाते हुए पूछा कि जब सुरक्षा के लिए खतरा बनी यह इमारत उनके ठीक बगल में बन रही थी, तब क्या अधिकारी “सो रहे थे”? हाई कोर्ट ने सुरक्षा के पहलू को सर्वोपरि मानते हुए फिलहाल निर्माण कार्य पर अस्थायी रोक लगा दी है, लेकिन नौसेना की देरी और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
यह विवाद तब गहराया जब नौसेना ने ‘जाधवजी मेंशन’ (ओपुल कंस्ट्रक्शंस) नामक इमारत को सुरक्षा दिशानिर्देशों का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी। नेवी का तर्क है कि वीवीआईपी हेलीपोर्ट और संवेदनशील नौसैनिक हवाई अड्डे के 500 मीटर के भीतर इतनी ऊंची इमारत का निर्माण सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। हालांकि, कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि निर्माण कार्य 2021 से चल रहा था और नौसेना ने 2025 के मध्य में जाकर इस पर आपत्ति जताई, तब तक इमारत 15वीं मंजिल तक पहुँच चुकी थी।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे ने मौखिक रूप से कहा कि सुरक्षा पहलू महत्वपूर्ण है, लेकिन नौसेना को अधिक सतर्क रहना चाहिए था। कोर्ट ने पूछा कि सैन्य अड्डे के आसपास नियमित निगरानी क्यों नहीं की गई? पीठ ने तंज कसते हुए कहा, “क्या आप इस पूरे समय सो रहे थे? आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि ऐसा निर्माण कार्य शुरू ही न हो।” अदालत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा चिंताओं के बावजूद, प्रशासन और सैन्य अधिकारियों की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब बीएमसी ने वर्षों पहले इसकी अनुमति दे दी थी।
ये भी पढ़ें- महाराष्ट्र में 5 मार्च से स्कूल बसों का चक्का जाम, बोर्ड एग्जाम के बीच ट्रांसपोर्टरों का हड़ताल का अल्टीमेटम
आईएनएस शिकरा के पास बन रही इमारत के बिल्डर ओपुल कंस्ट्रक्शंस के वरिष्ठ वकील जनक द्वारकादास ने कोर्ट में दलील दी कि 2011 के दिशानिर्देशों के अनुसार नौसेना से एनओसी (NOC) लेना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि 15 वर्षों से जब कागजी प्रक्रिया चल रही थी और निर्माण शुरू हुआ, तब नौसेना ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया? बिल्डर के वकील ने यह भी तर्क दिया कि आसपास कई झुग्गियां हैं, जो सुरक्षा के लिए खतरा क्यों नहीं मानी जातीं? उनके अनुसार, 53.07 मीटर तक निर्माण की अनुमति पहले ही मिल चुकी थी और अब अचानक इसे रोकना अवैध है।
नौसेना के वकील आर.वी. गोविलकर ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि उन्होंने जुलाई 2025 में ही बीएमसी (BMC) को काम रोकने के लिए कहा था, लेकिन नगर निगम ने पूर्व स्वीकृतियों का हवाला देते हुए कार्रवाई नहीं की। नेवी का दावा है कि आईआईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार इस इमारत की ऊंचाई 76 मीटर तक जा सकती है, जो हवाई अड्डे के संचालन और दृश्यता (Visibility) के लिए खतरा है। पीठ ने फिलहाल सुझाव दिया है कि अंतिम सुनवाई होने तक 15 मंजिलों (लगभग 53 मीटर) तक के निर्माण की अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते यह 2010 की मूल शर्तों के अधीन हो। मामले पर अंतरिम आदेश शुक्रवार को आने की उम्मीद है।