महाराष्ट्र में 5 मार्च से स्कूल बसों का चक्का जाम, बोर्ड एग्जाम के बीच ट्रांसपोर्टरों का हड़ताल का अल्टीमेटम
Maharashtra School Bus Strike: महाराष्ट्र में स्कूल बस संगठनों ने 5 मार्च से राज्यव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। ई-चालान विवाद के चलते 10वीं-12वीं की परीक्षाओं पर संकट।
- Written By: अनिल सिंह
Maharashtra School Bus Fee Hike (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम) फाइल फोटो
School Bus Strike: महाराष्ट्र में बोर्ड परीक्षाओं के महत्वपूर्ण समय के बीच विद्यार्थियों और अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। राज्य की स्कूल बस मालिक संगठन ने अपनी विभिन्न प्रलंबित मांगों को लेकर 5 मार्च से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का कड़ा इशारा दिया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि अगले सात दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो पूरे महाराष्ट्र में स्कूल बसों के पहिए थम जाएंगे। वर्तमान में 12वीं की परीक्षाएं चल रही हैं और 20 फरवरी से 10वीं की परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं, ऐसे में बस सेवा बंद होने से लाखों छात्रों के परीक्षा केंद्र तक पहुंचने पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
इस आंदोलन को महाराष्ट्र ट्रांसपोर्टर्स एक्शन कमेटी ने भी अपना पूर्ण समर्थन दिया है। इस हड़ताल की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें केवल स्कूल बसें ही नहीं, बल्कि ट्रक, टेंपो, निजी बसें, टैक्सी और ऑटो रिक्शा चालक भी शामिल होने जा रहे हैं। परिवहन संगठनों का मुख्य विरोध ई-चालान प्रणाली के क्रियान्वयन को लेकर है। संगठनों का आरोप है कि परिवहन विभाग और पुलिस द्वारा ई-चालान के नाम पर मनमाने ढंग से भारी जुर्माना वसूला जा रहा है, जिससे छोटे वाहन मालिकों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
ई-चालान और अवैध जुर्माने के खिलाफ आर-पार की जंग
स्कूल बस मालिक संगठनों की सबसे प्रमुख मांग ई-चालान प्रणाली में सुधार करना है। बस मालिकों का दावा है कि मोटार वाहन विभाग द्वारा नियमों की आड़ लेकर बिना किसी स्पष्टीकरण के दंड वसूला जा रहा है। संगठनों के अनुसार, ई-चालान प्रणाली में पारदर्शिता की भारी कमी है और कई बार एक ही अपराध के लिए कई जगहों पर दंड लगा दिया जाता है। इस मुद्दे को लेकर पहले ही न्यायालय में याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई समाधान न निकलता देख अब चालकों ने सड़क पर उतरने का फैसला किया है।
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बोर्ड परीक्षाओं के दौरान छात्र परिवहन पर बड़ा संकट
मार्च का महीना छात्रों के लिए शैक्षणिक दृष्टि से सबसे अधिक संवेदनशील होता है। 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं विद्यार्थी के भविष्य की दिशा तय करती हैं। यदि 5 मार्च से बसें और ऑटो रिक्शा बंद होते हैं, तो उन छात्रों को सबसे अधिक परेशानी होगी जिनके परीक्षा केंद्र घर से दूर हैं। अभिभावकों में इस बात को लेकर भारी चिंता है कि ऐन मौके पर निजी वाहनों का इंतजाम करना न केवल महंगा होगा बल्कि ट्रैफिक जाम जैसी स्थितियों में समय पर केंद्र पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। प्रशासन से मांग की जा रही है कि वे बीच का रास्ता निकालें ताकि छात्रों का शैक्षणिक नुकसान न हो।
परिवहन क्षेत्र का एकजुट प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति
इस अनिश्चितकालीन हड़ताल का व्यापक असर केवल स्कूली शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन भी इससे प्रभावित होगा। ट्रक और टेंपो संगठनों के जुड़ने से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला पर असर पड़ सकता है। संगठनों ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया है कि वे पिछले कई महीनों से सरकार के साथ संवाद की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। अब सात दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है, जिसके बाद महाराष्ट्र के परिवहन तंत्र में एक बड़ा गतिरोध देखने को मिल सकता है।
