
अकोला मोर्णा सिंचाई परियोजना(सौजन्य-सोशल मीडिया)
Akola Morna Irrigation Project: अकोला पातुर तहसील के किसानों की जीवनरेखा मानी जाने वाली मोर्णा सिंचाई परियोजना आज भीषण दुरवस्था में है। लगभग 5 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता वाला यह प्रकल्प लगातार अपनी कार्यक्षमता खो रहा है, जिससे किसानों को सीधा नुकसान हो रहा है। पानी की कमी से खेती संकट में फंसने लगी है।
मोर्णा सिंचाई परियोजना की एकमात्र मुख्य नहर गाद से भर गयी है और जगह-जगह दरारें पड़ चुकी हैं। पानी के भारी रिसाव के कारण अंतिम छोर तक किसानों को पानी नहीं मिल रहा है। इसी तरह परियोजना की दीवार पर उगे वृक्ष काटे गए, लेकिन उनके अवशेष और जड़ें वहीं पड़ी हैं, जिससे दीवार की मजबूती पर खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा सुरक्षा दीवार का क्षरण, माप यंत्रों की खराबी, रस्तों की दुरवस्था और साफ-सफाई का अभाव जैसी समस्याएं परियोजना को निष्क्रय बना रही हैं।
इस संदर्भ में मोर्णा परियोजना के उप अभियंता आदित्य कासार का कहना है कि, मोर्णा परियोजना की सिंचन क्षमता में कहीं भी कमी नहीं है। इस परियोजना से 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही है और इसकी जलसंचय क्षमता 75 दलघमी है। इस वर्ष परियोजना 100 प्रतिशत भरी हुई है, इसलिए पानी की कमी का प्रश्न ही नहीं उठता। परियोजना की दीवारों पर वृक्ष उग आए थे।
जिन्हें हर वर्ष की तरह इस बार भी काटा गया है। कुछ स्थानों पर शाखाएं दिखाई देती हैं, जिन्हें हटाने और परियोजना क्षेत्र में स्वच्छता अभियान चलाने का कार्य जारी है। समय-समय पर देखभाल और दुरुस्ती की जाती है। किसानों को सिंचन में कोई परेशानी नहीं है और पर्याप्त पानी छोड़ने का समयबद्ध कार्यक्रम भी तैयार है।
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स्थानीय किसानों ने तीव्र रोष प्रकट करते हुए कहा है कि, उन्हें पानी होते हुए भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, बांध है पर इसका उपयोग नहीं हो पा रही है। किसानों ने प्रशासन से केवल निरीक्षण और आश्वासन देने के बजाय तात्कालिक दुरुस्ती, नहर की सफाई करने और चांध की दीवार से अवशेष हटाने की मांग की है। व्यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो मोर्णा सिंचाई परियोजना की शेष क्षमता भी इतिहास बन जाएगी।






