
CJI गवई का महाराष्ट्र विधानमंडल ने किया सत्कार
मुंबई: सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए महाराष्ट्र के सुपुत्र भूषण गवई का मंगलवार को महाराष्ट्र विधानमंडल की ओर से भव्य सत्कार किया गया। मुंबई स्थित विधान भवन के सेंट्रल हॉल में आयोजित सीजेआई के सत्कार समारोह में विधानमंडल के दोनों सदनों सदस्य एवं कई अन्य मान्यवर उपस्थित रहे।
इस दौरान सीजेआई ने भारत के संविधान को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण, मौलिक अधिकारों, मौलिक कर्तव्यों और प्रारूप समिति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान मेरे दिमाग में स्कूली दिनों से ही बसा हुआ है। संविधान में रक्तहीन क्रांति की शक्ति है। संविधान ने देश के हर व्यक्ति को मान, सम्मान और स्वाभिमान दिया है।
मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई के अभिनंदन समारोह में मंच पर विधान परिषद के अध्यक्ष राम शिंदे, विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, अजीत पवार एवं अन्य नेता मौजूद थे। इस दौरान विधानमंडल द्वारा दिए गए अभिनंदन को स्वीकार करते हुए यह सीजेआई भावविभोर हो गए। उन्होंने कहा कि मेरे पिता और इस सदन का एक अलग ही नाता है और ये याद दिलाया कि उनके पिता इस सदन से 30 साल तक जुड़े रहे थे।
जाति आधारित मतभेदों को दूर करना जरुरी
सीजेआई ने कहा कि सबसे पहले मैं महाराष्ट्र की जनता और महाराष्ट्र की धरती को नमन करता हूं। आपने मुझे भारत के संविधान पर बोलने के लिए कहा है। मैंने हमेशा खुद को भारत के संविधान का विद्यार्थी माना है। भारतीय संविधान के बारे में बात करते हुए सीजेआई गवई ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए। चीफ जस्टिस ने आंबेडकर को उद्धृत करते हुए कहा था कि देश पर शासन करने वालों को कड़े संघर्ष के बाद मिली आजादी की रक्षा के लिए जाति आधारित मतभेदों को दूर करना चाहिए।
संविधान सर्वोच्च है
सीजेआई गवई ने न्यायपालिका और कार्यपालिका में श्रेष्ठता की होड को लेकर चल रही बहस पर भी इशारों-इशारों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका का महत्व एक समान है। संसद की सर्वोच्चता को लेकर हाल ही में दिए गए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बयान की ओर इशारा करते हुए गवई ने कहा कि देश में संविधान ही सर्वोच्च है और संविधान प्रदत्त अधिकारों के तहत न्यायालय नागरिकों के अधिकारों के रक्षक और संरक्षक के रूप में काम करती है।
सीजेआई गवई ने भारतीय संविधान के रचयिता डॉ. बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि हम सभी को संविधान की सर्वोच्चता में विश्वास करना चाहिए हैं। गवई ने कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था कि न्यायपालिका को कार्यपालिका के हस्तक्षेप से मुक्त होना चाहिए। तो संविधान देश को शांति और युद्ध के समय एकजुट रख सकेगा। धनखड़ ने अप्रैल महीने में कहा था कि देश में संसद ही सर्वोच्च है और कोई भी इससे ऊपर नहीं है।
आखिरी सत्कार
सीजेआई ने कहा कि विधानमंडल द्वारा किया गया अभिनंदन मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मैं इसे न केवल दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा मुझे दिया गया सम्मान मानता हूं, बल्कि महाराष्ट्र की 12 करोड़ 87 लाख जनता का आशीर्वाद भी मानता हूं। सबसे पहले मैं महाराष्ट्र की जनता और महाराष्ट्र की धरती को नमन करता हूं।
सीजेआई गवई ने कहा कि मैंने राज्य में जहां-जहां भी काम किया है, वहां-वहां से अभिनंदन स्वीकार करने का निर्णय लिया था। खास तौर पर छत्रपति संभाजीनगर, अमरावती और नागपुर। इसके बाद उन्होंने ये भी कहा कि मेरा अंतिम अभिनंदन समारोह है। अंत में उन्होंने कवी गोविंदाग्रज की पंक्तियों, मंगल देशा, पवित्र देशा, महाराष्ट्र देशा, प्रणाम माझा घ्यावा, श्री महाराष्ट्र देशा से महाराष्ट्र का अभिवादन किया। इस पर मंच पर उपस्थित मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों सहित मान्यवरों एवं दोनों सदनों के सदस्यों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सीजेआई का अभिवादन किया।






