छत्रपति शिवाजी-टीपू विवाद को लेकर बैकफुट पर आई कांग्रेस! हर्षवर्धन सपकाल ने मांगी माफी

Harshwardhan Sapkal Apology: शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान विवाद को लेकर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने अपने बयान पर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य एकता का संदेश देना था।
Harshwardhan Sapkal: छत्रपति शिवाजी-टीपू विवाद को लेकर बैकफुट पर आई कांग्रेस! हर्षवर्द्धन सपकाल ने मांगी माफी
हर्षवर्धन सपकाल (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Shivaji Maharaj Tipu Sultan Controversy: महाराष्ट्र की राजनीति में छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान के नाम पर छिड़ा विवाद अब एक नया मोड़ ले चुका है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मंगलवार को अपनी विवादास्पद टिप्पणी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था, बल्कि एकता का संदेश देना था।

विवाद की जड़ क्या है?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब मालेगांव महानगर पालिका की उप महापौर निहाल अहमद के कार्यालय में टीपू सुल्तान का चित्र लगाया गया। इसका विरोध शिवसेना और हिंदू संगठनों ने किया। इसी दौरान सपकाल ने एक बयान दिया जिसमें उन्होंने शिवाजी महाराज के 'स्वराज' और टीपू सुल्तान के अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का उल्लेख किया। इस बयान को सोशल मीडिया पर "तुलना" के रूप में प्रचारित किया गया, जिसके बाद पुणे में उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई।

सपकाल का स्पष्टीकरण और भाजपा पर हमला

हर्षवर्धन सपकाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज मेरे आदर्श, प्रेरणा और गौरव हैं। मैंने केवल इतना कहा था कि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों से लड़ने में महाराज से प्रेरणा ली थी। मेरे भाषण को संदर्भ से काटकर पेश किया गया ताकि सामाजिक तनाव पैदा हो सके।

उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने दुर्भावनापूर्ण एजेंडे के तहत वीडियो को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है। सपकाल के अनुसार, भाजपा और उसके सहयोगी दल ऐतिहासिक हस्तियों का उपयोग समाज को बांटने और धार्मिक ध्रुवीकरण के लिए कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने जताई थी कड़ी आपत्ति

बता दें कि इस कथित तुलना पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि महाराष्ट्र अपने आराध्य देव शिवाजी महाराज का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। इस दबाव और चौतरफा आलोचना के बाद कांग्रेस नेता ने बैकफुट पर आते हुए माफी मांगना ही बेहतर समझा। उन्होंने अंत में कहा कि इतिहास पर बहस विद्वतापूर्ण होनी चाहिए, न कि इसे जातिगत नफरत का जरिया बनाना चाहिए।

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