Maharashtra Urban Scheme: 31 करोड़ की जलापूर्ति योजना ठप, भाजपा नेता ने उठाए गंभीर सवाल

Maharashtra Golden Jubilee Urban Development Campaign के तहत इचलकरंजी में मंजूर रुपये की जलापूर्ति योजना पर सवाल खड़े हो गए हैं। BJP नेता दाभोले ने निर्माण में देरी को लेकर प्रशासन को घेरा है।
Ichalkaranji water tank project
इचलकरंजी वॉटर टैंक प्रोजेक्ट (सौ. सोशल मीडिया )
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Ichalkaranji News In Hindi: महाराष्ट्र स्वर्ण जयंती नगरोत्थान महाअभियान के तहत इचलकरंजी शहर के लिए मंजूर किए गए 6 पानी की टंकियों और पंपिंग मशीनरी के निर्माण कार्य में हो रही अत्यधिक देरी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भारतीय जनता पार्टी के इचलकरंजी उपाध्यक्ष उमाकांत दाभोले ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये की यह योजना अत्यंत धीमी और असंतोषजनक गति से चल रही है। उन्होंने निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की।

31 करोड़ का प्रोजेक्ट, 6 माह बाद भी काम शून्य

शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए इस योजना की कुल अनुमानित लागत 31 करोड़ रुपये से अधिक है। इस महत्वपूर्ण परियोजना का ठेका नवी मुंबई की कंपनी 'गोरुर इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' को दिया गया है। कंपनी को 12 सितंबर 2025 को कार्य आदेश जारी किया गया था। अनुबंध की शर्तों के अनुसार, यह पूरा काम 18 महीनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य है।

दाभोले ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कार्य आदेश दिए जाने के बाद से अब तक करीब 5 से 6 महीने बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रगति शून्य के बराबर है। पीबी पाटिल माला, शांतिनगर, जवाहरनगर, पुराना चंदूर रोड, तोरणानगर और तुलजाभवानी नगर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बनने वाले ये जलकुंभ शहर की प्यास बुझाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

क्या ब्लैक लिस्टेड कंपनी को दिया गया काम ?

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब उमाकांत दाभोले ने ठेकेदार कंपनी के पिछले रिकॉर्ड पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि संबंधित कंपनी का पिछला कामकाज बेहद असंतोषजनक रहा है। वर्ष 2021 में तत्कालीन परिषद ने इसी कंपनी को 'ब्लैकलिस्ट' करने का प्रस्ताव रखा था। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि शहर के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी और महंगी परियोजना उसी विवादित कंपनी को दोबारा क्यों सौंपी गई?