Jalna School Bus Driver Rape Case प्रतीकात्मक तस्वीर
Jalna Crime News: महाराष्ट्र के जालना जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने अभिभावकों के भरोसे और स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक स्कूल मिनीबस के ड्राइवर ने, जिस पर माता-पिता पिछले कई वर्षों से अपनी संतानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंप रहे थे, मानवता की सारी हदें पार कर दीं। 32 वर्षीय ड्राइवर ने स्कूल से घर लौट रही एक 15 वर्षीय नाबालिग छात्रा को बस से उतरने नहीं दिया और उसे सुनसान इलाके में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस घटना के बाद जालना सहित पूरे राज्य में आक्रोश की लहर दौड़ गई है।
जालना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी भरत भीमराव मगरे को गिरफ्तार कर लिया है। उसे जालना जिला अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे 7 फरवरी 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्य जुटाने में लगी है।
आरोपी स्कूल बस ड्राइवर भरत मगरे जालना के भोकरदन तहसील के कोदोली गांव का निवासी है और पिछले 5 से 7 वर्षों से स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने का काम कर रहा था। इतने लंबे समय से जुड़े होने के कारण स्थानीय माता-पिता उस पर अटूट विश्वास करते थे। पुलिस के अनुसार, इसी विश्वास का फायदा उठाकर उसने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। 2 फरवरी 2026 को उसने बस के अन्य सभी बच्चों को उनके घर छोड़ दिया, लेकिन पीड़ित छात्रा को बस में ही बंधक बनाए रखा।
ये भी पढ़ें- Ola Uber Strike: ओला-उबर ड्राइवर 7 फरवरी को करेंगे हड़ताल, जानें क्यों होगा मुंबई में चक्का जाम
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी छात्रा को जबरन नांजा शिवर इलाके के एक सुनसान खेत में ले गया। वहां उसने नाबालिग के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया और उसे धमकी दी। घर पहुँचने पर डरी-सहमी पीड़ित बच्ची ने अपनी मां को आपबीती सुनाई। बेटी की बात सुनकर मां के पैरों तले जमीन खिसक गई और उन्होंने बिना देर किए भोकरदन पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को धर दबोचा।
भोकरदन पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि स्कूली वाहनों के ड्राइवरों का चरित्र सत्यापन (Character Verification) अब और सख्ती से किया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर स्कूल प्रशासन और परिवहन विभाग की निगरानी प्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। स्थानीय संगठनों ने मांग की है कि आरोपी को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।