
जालना विधानसभा सीट
जालना: जालना लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली जालना विधानसभा सीट 1951 से अस्तित्व में है। यह एक सामान्य श्रेणी की सीट है। इस सीट पर मस्लिम समुदाय का बोलबाला माना जाता है। 1951 चुनाव के समय अस्तित्व में आई इस सीट पर अब तक सबसे ज्यादा दबदबा कांग्रेस का देखने को मिला है। कांग्रेस ने कुल 6 बार इस सीट पर जीत दर्ज की है। जबकि, 4 बार शिवसेना का परचम लहराया है। खास बात यह है कि 1994 के बाद से यहां पर सांसद बदलते आया है। इसे देखते हुए इस बार में चुनाव रोमांच देखने को मिल सकता है।
महाराष्ट्र के 288 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में एक जालना विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है। यह विधानसभा जालना जिले और जालना लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। जालना विधानसभा से आज तक के इतिहास में शिवसेना और कांग्रेस के नेता विधायक चुने गए। 2014 में शिवसेना के अर्जुन खोतकर यहां से विजयी हुए। वहीं, साल 2019 में कांग्रेस का विधायक निर्वाचित हुए।
इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं का बोलबाला माना जाता है। पहले के कुछ वर्षों में इस सीट पर कांग्रेस का राज था, लेकिन 1994 के बाद हर पांच साल में कभी कांग्रेस तो कभी शिवसेना के भी विधायक निर्वाचित हुए। साल 2019 में कांग्रेस का विधायक निर्वाचित हुए।
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जालना विधानसभा में अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 45,093 हैं, जो 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 13.94% है। जबकि, अनुसूचित जनजाति के मतदाता लगभग 4,335 हैं, जो 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 1.34% है। वहीं इस विधानसभा में मुस्लिम मतदाता लगभग 64,696 हैं, जो मतदाता सूची विश्लेषण के अनुसार लगभग 20% है। जालना विधानसभा में ग्रामीण मतदाता लगभग 99,762 हैं जबकि शहरी मतदाता लगभग 223,752 हैं। साल 2019 के संसदीय चुनाव के अनुसार जालना विधानसभा के कुल 323481 मतदाता है।

जालना विधानसभा सीट पहले कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी। लेकिन साल 1994 के बाद से यहां पर शिवसेना के भी विधायक निर्वाचित हुए है। 1994 के बाद हर पांच साल में कभी कांग्रेस तो कभी शिवसेना के भी विधायक निर्वाचित हुए। साल 2019 में कांग्रेस का विधायक निर्वाचित हुए थे। ऐसे में पिछले रिकार्ड देखे तो शिवसेना की मौका मिल सकता है। लेकिन शिवसेना के विभाजन के बाद इस बार कुछ अलग ही स्थिति देखने को मिल सकती है।






