Jalgaon Mob Lynching प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
Child Kidnapping Rumors Maharashtra: महाराष्ट्र के जलगांव जिले से ‘मॉब लिंचिंग’ (Mob Lynching) की एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ बच्चा चोरी के महज संदेह में भीड़ ने एक 30 वर्षीय अज्ञात युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। यह घटना जलगांव तालुका के अव्हाणे शिवारा क्षेत्र में मंगलवार को हुई। बिना किसी ठोस सबूत या पुलिस को सूचना दिए, उग्र भीड़ ने कानून को अपने हाथ में लिया और युवक पर जानलेवा हमला कर दिया।
इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और ‘भीड़ के न्याय’ की खतरनाक प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए हत्या के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, अव्हाणे शिवारा के लक्ष्मी जिनिंग इलाके में एक अज्ञात युवक संदिग्ध अवस्था में घूम रहा था। स्थानीय निवासी मनोहर भगवान सोनवणे के तीन साल के बेटे विराट को लेकर लोगों के मन में अचानक यह डर बैठ गया कि युवक उसे अगवा करने की कोशिश कर रहा है। बिना किसी पुष्टि के यह खबर आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते दर्जनों लोग वहां जमा हो गए। भीड़ ने युवक को घेर लिया और उस पर लात-घूंसों व डंडों से हमला कर दिया। मॉब लिंचिंग का पीड़ित युवक रहम की भीख मांगता रहा, लेकिन भीड़ के ‘अंधे कानून’ ने उसे खून से लथपथ होने तक नहीं छोड़ा।
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घटना की सूचना मिलते ही अव्हाणे गांव के सरपंच पिंटू पाटिल ने जलगांव पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर गंभीर रूप से घायल युवक को जिला सरकारी अस्पताल पहुँचाया, लेकिन इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने हत्या की धारा के तहत मामला दर्ज कर मनोहर सोनवणे, अजय कोली, प्रशांत सोनवणे, अजय उर्फ बादल सोनवणे और अफताब आरिफ खाटीक को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के आधार पर अन्य हमलावरों की भी पहचान की जा रही है।
इस मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मृतक की पहचान करना है। युवक के पास से कोई पहचान पत्र या मोबाइल नहीं मिला है, जिससे उसकी शिनाख्त अभी तक नहीं हो सकी है। पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से पुरजोर अपील की है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के दिखने पर कानून अपने हाथ में न लें। पुलिस अधिकारियों ने कहा, “सोशल मीडिया पर बच्चा चोरी की अफवाहों पर विश्वास न करें और किसी भी स्थिति में पुलिस हेल्पलाइन नंबर 100/112 पर तुरंत सूचित करें।”