Jal Jeevan Mission :जल जीवन मिशन (सोर्सः सोशल मीडिया)
Goregaon News: गोरेगांव तहसील के ग्राम घोटी में जैसे ही ग्राम पंचायत चुनाव नजदीक आए हैं, वैसे ही बीते वर्षों के कामकाज की पोल खुलने लगी है। ग्राम घोटी में वर्ष 2020–21 में जल जीवन मिशन के तहत वार्ड क्रमांक 3 में सौर ऊर्जा नल योजना लागू की गई थी, जिस पर प्रशासन की ओर से लगभग 10 लाख रुपये की निधि खर्च की गई थी।
हालांकि, आरोप है कि यह सौर ऊर्जा नल योजना केवल छह माह तक ही चालू रह सकी। इसके बाद ग्राम पंचायत इस योजना की देखरेख करने में पूरी तरह विफल रही। नागरिकों का कहना है कि यह परियोजना विवादित स्थान पर स्थापित की गई थी। वर्तमान में वहां निजी निर्माण कार्य शुरू होने से लाखों रुपये की लागत से बनाई गई सौर ऊर्जा नल योजना को उखाड़कर फेंक दिया गया है। इसके बावजूद ग्राम पंचायत अपनी गलतियों पर पर्दा डालते हुए चुप्पी साधे हुए है।
जानकारी के अनुसार ग्राम घोटी के वार्ड क्रमांक 3 और दलित बस्ती स्थित वार्ड क्रमांक 4 में ग्राम पंचायत द्वारा अब तक नियमित जलापूर्ति की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। दोनों ही वार्डों में वर्षों से पानी की समस्या बनी हुई है। लगभग पांच वर्ष पूर्व स्थापित की गई सौर ऊर्जा नल योजना का आज कोई अस्तित्व नजर नहीं आता। हाल ही में उस स्थान पर निजी निर्माण कार्य चल रहा है, जिससे योजना का पूरा सिस्टम ही हटा दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020-21 में शासन द्वारा सौर ऊर्जा आधारित पानी की टंकी और पंप प्रणाली स्थापित की गई थी, जिस पर करीब 10 लाख रुपये खर्च किए गए थे। लेकिन यह योजना कभी प्रभावी रूप से शुरू ही नहीं हो पाई। परिणामस्वरूप संबंधित बस्ती के नागरिकों को आज तक इस योजना से एक बूंद भी पानी नसीब नहीं हुआ, ऐसा गंभीर आरोप ग्रामवासियों ने किया है।
इस प्रकरण में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। ग्राम पंचायत घोटी के स्वामित्व का शासकीय बोरवेल मौजूद होने के बावजूद, उस पर एक निजी व्यक्ति द्वारा अपनी बोर मशीन लगाए जाने का आरोप लगाया गया है। यह मामला गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि इसमें शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग और अवैध हस्तक्षेप की आशंका जताई जा रही है।
पूरे मामले में ग्राम पंचायत की भूमिका संदेहास्पद बताई जा रही है। दलित बस्ती की महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को पानी के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है। कई बार उन्हें निजी कुओं या अन्य वार्डों पर निर्भर रहना पड़ता है। शासन द्वारा लाखों रुपये खर्च कर स्थापित की गई सौर ऊर्जा जलापूर्ति योजना का लाभ जरूरतमंदों तक न पहुंचने से यह योजना केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है, ऐसी तीव्र भावना नागरिकों में व्याप्त है।
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ग्राम सचिव राजकुमार पटले ने कहा कि इस विषय पर ग्राम पंचायत में चर्चा की गई है, लेकिन संबंधित निजी निर्माण कार्य करने वाले व्यक्ति को अब तक कोई नोटिस नहीं दिया गया है। जल्द ही ग्राम पंचायत की ओर से इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जाएगी।