नवेगांव-नागझिरा टाइगर प्रोजेक्ट का बफर जोन बढ़ा, क्या अब खुलेगा मुरदोली पर्यटन गेट? स्थानीकों को इंतजार
Murdoli Gate Reopening Demand: गोंदिया जिले में नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व का बफर जोन बढ़ने के बाद 1996 से बंद मुरदोली पर्यटन गेट को फिर से खोलने की मांग तेज हो गई है।
- Written By: आंचल लोखंडे
tiger reserve buffer zone (सोर्सः सोशल मीडिया)
Navegaon Nagzira Tiger Reserve: के बफर जोन का विस्तार कर दिया गया है और टाइगर रिजर्व से सटे कई गांव अब इस बफर क्षेत्र में शामिल हो गए हैं। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि क्या इससे स्थानीय लोगों के रोजगार पर असर पड़ेगा।
बफर जोन में शामिल गांवों के अधिकांश युवा रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन करते हैं, जबकि गांव में रहने वाले बुजुर्ग खेती-बाड़ी या जंगल से जुड़े काम करके जीवन यापन करते हैं। लेकिन बफर जोन बढ़ने के बाद जंगल से जुड़े कार्यों पर कुछ प्रतिबंध लगने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि मुरदोली पर्यटन गेट को फिर से खोला जाए, ताकि इलाके में पर्यटन बढ़े और रोजगार के अवसर पैदा हों।
1996-97 से बंद है मुरदोली गेट
साल 2013 में नवेगांव राष्ट्रीय उद्यान और नागजीरा वन्यजीव अभयारण्य को मिलाकर नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व बनाया गया था। इस प्रकल्प में कई पर्यटन प्रवेश द्वार शुरू हैं, जिनमें पिटेझरी, मंगेझरी, चोरखमारा, न्यू चोरखमारा, चंद्रपुर, जांभड़ी, बकी, कोहली, पितांबरटोला और उमरझरी गेट शामिल हैं।
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तीन दशक से बंद ‘समृद्धि का द्वार’
इन गेटों को नागझिरा, न्यू नागझिरा, नवेगांव और कोका जैसे अलग-अलग पर्यटन जोन में विभाजित किया गया है, जहां से पर्यटक जंगल सफारी के लिए प्रवेश कर सकते हैं। हालांकि नागझिरा पर्यटन का सबसे पुराना प्रवेश द्वार मुरदोली गेट वर्ष 1996-97 से बंद है और अब तक इसे दोबारा शुरू नहीं किया गया है। इसके कारण स्थानीय क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार के अवसरों पर नकारात्मक असर पड़ा है।
रोजगार की समस्या का हो सकता है समाधान
मुरदोली गेट के आसपास के अधिकांश गांव आदिवासी बहुल हैं और उनकी आजीविका मुख्य रूप से जंगल और उससे जुड़े कार्यों पर निर्भर करती है। ऐसे में अगर यह गेट दोबारा शुरू किया जाता है तो स्थानीय लोगों को पर्यटन से जुड़े रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुरदोली गेट पिछले तीन दशकों से बंद है, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने इसे फिर से शुरू कराने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया। इसके कारण इलाके में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है।
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पर्यटकों के लिए भी आसान होगा आवागमन
मुरदोली गेट National Highway 753 पर कोहमारा-गोंदिया मार्ग पर स्थित है। यह कोहमारा से लगभग 20 किलोमीटर और Gondia से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर है।पर्यटन के लिहाज से यह गेट काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। गोंदिया जिला रेल और हवाई मार्ग से जुड़ा हुआ है, जबकि कोहमारा मुंबई–कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। ऐसे में दोनों जगहों से आने वाले पर्यटकों के लिए यह प्रवेश द्वार काफी सुविधाजनक हो सकता है।
चुलबंद जलाशय को भी मिल सकता है नया जीवन
यदि मुरदोली गेट दोबारा शुरू होता है, तो पास स्थित चुलबंद जलाशय को भी पर्यटन के लिहाज से नई पहचान मिल सकती है। तीन-चार दशक पहले यह जलाशय एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध था।
ग्रामसभा ने भेजा प्रस्ताव
पाटेकुर्रा ग्राम पंचायत के सरपंच प्रशांत बालसनवार ने बताया कि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए ग्रामसभा ने मुरदोली गेट खोलने का प्रस्ताव पारित किया है और संबंधित विभाग को ज्ञापन भी सौंपा गया है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत पाटेकुर्रा के साथ-साथ मुंडीपार और मुरदोली ग्राम पंचायतों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।
