शराब ही नहीं, औषधि निर्माण में भी अहम भूमिका निभाता है महुआ, बना रोजगार का साधन
Mahua Flower: गोंदिया और भंडारा में महुआ फूल न केवल शराब बल्कि औषधि और ग्रामीण रोजगार का प्रमुख साधन बन गया है, जिससे हर साल करोड़ों का कारोबार होता है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Gondia forest produce (सोर्सः सोशल मीडिया)
Gondia Forest Produce: महुआ के फूल का नाम लेते ही आमतौर पर लोगों के मन में उससे बनने वाली शराब का ख्याल आता है, लेकिन महुआ सिर्फ शराब तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण आजीविका का साधन भी है और औषधि निर्माण में भी इसकी अहम भूमिका होती है।
ग्रीष्मकाल के दौरान जब खेतिहर मजदूरों को काम नहीं मिलता, तब वे महुआ के फूल एकत्र कर उन्हें बेचकर आय अर्जित करते हैं। पूर्व विदर्भ के गोंदिया और भंडारा जिलों में महुआ को ‘रानमेवा’ कहा जाता है, और यह स्थानीय लोगों के लिए किसी कल्पवृक्ष से कम नहीं है।
जंगलों में जाकर फूलों का संग्रहण
इन दिनों वन क्षेत्रों के गांवों में ‘पीला सोना’ कहे जाने वाले महुआ फूल गिरना शुरू हो गए हैं। ग्रामीण सुबह से ही खेतों और जंगलों में जाकर फूलों का संग्रहण कर रहे हैं। महुआ की सुगंध पूरे वातावरण में फैल जाती है, जो राहगीरों को भी आकर्षित करती है।
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महुआ राज्य की प्रमुख वनोपज में से एक है। इसके संग्रहण के लिए ग्रामीण पूरे परिवार के साथ सुबह-सुबह जंगलों में जाते हैं। सुरक्षा के लिए वे लाठी और फूल इकट्ठा करने के लिए टोकरी साथ रखते हैं। जैसे-जैसे सूरज ऊपर चढ़ता है, पेड़ों से फूल गिरना कम हो जाता है।
पीढ़ियों से जारी है महुआ संग्रहण
यहां के किसान और मजदूर पीढ़ियों से महुआ का उपयोग अपने दैनिक जीवन में करते आ रहे हैं। मार्च की शुरुआत से महुआ संग्रहण का कार्य शुरू हो जाता है, जो मई के अंत तक चलता है। खास बात यह है कि महुआ के फूल पेड़ों से तोड़ने नहीं पड़ते, बल्कि रात में स्वयं ही जमीन पर गिर जाते हैं। इसी कारण ग्रामीण सुबह चार बजे से ही फूल बीनने निकल पड़ते हैं। संग्रहित फूलों को सुखाकर बाजार में बेचा जाता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में हर साल करोड़ों रुपये का लेन-देन होता है।
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महुआ की बहुउपयोगिता
महुआ एक बहुउपयोगी और छायादार वृक्ष है। इसके हर भाग का उपयोग किया जाता है। गर्मियों में इसकी छांव मनुष्यों और वन्यजीवों को राहत देती है। यह कई पक्षियों का सुरक्षित आश्रय भी है। महुआ का पेड़ वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में सहायक होता है। इसके अलावा गरीब परिवारों को इससे सालभर के लिए जलाऊ लकड़ी मिलती है। इसकी छाल, फल और फूलों में औषधीय गुण होते हैं, जिनका उपयोग आयुर्वेदिक उपचार में किया जाता है।
