
गोंदिया क्रीडा संकुल (सौजन्य-नवभारत)
Gondia News: प्रशिक्षण, सुविधाएं, प्रोत्साहन, नियोजन, व्यवस्थापन के पांच सिद्धांतों के संगम के साथ जरूरी जनसंख्या होने पर ही सही मायने में राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के उभरते खिलाड़ी तैयार होंगे। लेकिन, गोंदिया जिले का क्रीड़ा विभाग इससे दूर है। जिले के 6 तहसीलों में कोई तहसील क्रीड़ा अधिकारी नहीं है। क्रीड़ा अधिकारी और क्रीड़ा मार्गदर्शक के पद भी खाली हैं।
जिला क्रीड़ा अधिकारी के पद की जिम्मेदारी प्रभारी के कंधों पर है। इसी महीने उनके सेवानिवृत्त होने से जिला क्रीड़ा विभाग कठपुतली बनकर रह जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में कई तहसील क्रीड़ा संकुलों में अधिकारी नहीं हैं, एक ही अधिकारी पर कई तहसील का बोझ है। क्रीड़ा सुविधाओं और प्रतियोगिताओं के आयोजन में रुकावटें आती हैं और खिलाड़ियों को सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाता है।
हर जिले के लिए जिला क्रीड़ा अधिकारी कार्यालय शुरू किए गए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य जिले में क्रीड़ा संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने, खिलाड़ियों का विकास करने, शालेय, आंतरशालेय स्पर्धा आयोजित करने तथा राज्य शासन की विभिन्न क्रीड़ा योजनाओं को लागू करना है।
इससे जिले के क्रीड़ा विकास को बढ़ावा मिलता है। यह कार्यालय क्रीड़ा विषय नियम, उपक्रम लागू करने, क्रीड़ा को बढ़ावा देना, स्कूल स्तर पर अलग-अलग क्रीड़ा प्रतियोगिताएं आयोजित करता है और खिलाड़ियों को एक प्लेटफॉर्म देता है।
जिले में राज्य सरकार की क्रीड़ा विकास योजनाओं को असरदार तरीके से लागू करता है और ग्रामीण क्षेत्रों में छिपे हुए खिलाड़ियों को पहचानकर उन्हें प्रोत्साहित करता है। जिला क्रीड़ा संकुल बनाने का मुख्य उद्देश्य जिले खिलाड़ियों को एक प्लेटफॉर्म देना है।
यह भी पढ़ें – अकोला में ओवैसी की रैली में मची भगदड़, पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज, मची अफरा-तफरी, देखें VIDEO
जिला क्रीड़ा कार्यालय की जिम्मेदारी प्रभारी के पास है। प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी मरस्कोल्हे सालेकसा में तहसील क्रीड़ा अधिकारी के तौर पर काम कर रहे हैं। उनके पास देवरी, आमगांव और गोंदिया तहसील का अतिरिक्त चार्ज भी है।
गोंदिया जिले के 8 तहसीलों में सिर्फ दो तहसील क्रीड़ा अधिकारी कार्यरत है। सड़क अर्जुनी, सालेकसा के तहसील क्रीड़ा अधिकारी 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इस वजह से सभी आठ तहसील क्रीड़ा कार्यालयों को अधिकारियों का इंतजार करना पड़ेगा। इसके अलावा, क्रीड़ा अधिकारियों के 3 में से 2 पद खाली हैं और क्रीड़ा मार्गदर्शन के तीनों पद खाली हैं।
इस वजह से खिलाड़ियों समेत क्रीड़ा विकास रुका हुआ है। वहीं खिलाड़ियों को मिलने वाले सुविधाएं और सरकारी योजना का फायदा मिलने में रुकावटें आ रही हैं। पदों के रिक्त होना, अधिकारी व प्रशिक्षकों की कमी, संसाधनों की कमी, खिलाड़ियों को कोई मार्गदर्शन नहीं, क्रीड़ा प्रतियोगिताओं पर असर व सुविधाओं की कमी है।






