'राहु केतु' में काम कर पूरा हुआ पुलकित के बचपन का सपना, मां को बताया ताकत

Pulkit Samrat ने बताया कि उन्होंने 'राहु केतु' को क्यों चुना। फैंटेसी फिल्म में काम करना उनका बचपन का सपना था। उन्होंने एक्टिंग करियर में अपनी मां के सपोर्ट को सबसे बड़ी ताकत बताया।
Pulkit Samrat Rahu Ketu
Pulkit Samrat Rahu Ketu (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
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Pulkit Samrat Rahu Ketu: अभिनेता पुलकित सम्राट की अपकमिंग फैंटेसी फिल्म 'राहु केतु' का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हो चुका है। हाल ही में एक इंटरव्यू में पुलकित ने खुलासा किया कि इस फिल्म को 'हाँ' कहने के पीछे क्या असली वजह थी।

पुलकित ने बताया कि यह फैसला सिर्फ डायरेक्टर विपुल विग या को-स्टार वरुण शर्मा के साथ काम करने की चाहत से नहीं, बल्कि बचपन के एक पुराने सपने से जुड़ा है।

फैंटेसी फिल्म में काम करने का बचपन का सपना

पुलकित ने बताया कि 'राहु केतु' की स्क्रिप्ट ने उन्हें तुरंत अपनी ओर खींच लिया, क्योंकि यह उनके बचपन के शौक से जुड़ी हुई थी।

बचपन का लगाव: पुलकित ने कहा, "मुझे बचपन से फैंटेसी फिल्में पसंद हैं। 'अजूबा' और 'छोटा चेतन' जैसी फिल्में देखकर तो मैं खो जाता था।"

सपना सच हुआ: उन्होंने बताया कि एक फैंटेसी फिल्म में काम करना उनका बचपन का सपना बन गया था। जब 'राहु केतु' की स्क्रिप्ट उनके पास आई, तो फैंटेसी एलिमेंट्स ने उन्हें तुरंत आकर्षित किया।

परफेक्ट कॉम्बिनेशन: "ऐसा लगा जैसे बचपन का वो सपना सच होने वाला है। सब कुछ परफेक्ट लग रहा था- स्क्रिप्ट, डायरेक्टर विपुल विग और वरुण के साथ काम करने का मौका। मुझे तुरंत पता चल गया कि मुझे यह फिल्म करनी ही है।”

पुलकित के लिए यह कहानी सिर्फ एक फिल्म साइन करने की नहीं, बल्कि सपनों को हकीकत में बदलने की है।

मां का सपोर्ट: सफलता की असली ताकत

पुलकित मानते हैं कि जब पैशन के साथ परिवार का सपोर्ट मिल जाए, तो कोई भी सपना नामुमकिन नहीं रहता। उनकी सफलता की कहानी में उनकी मां का योगदान सबसे खास है।

परिवार का विरोध: अभिनेता ने भावुक होकर याद किया कि जब वह एक्टिंग के लिए मुंबई जाना चाहते थे, तो पूरा परिवार इसके खिलाफ था। सबको लगता था कि यह एक रिस्की फैसला है।

मां का विश्वास: उनकी मां अकेली ऐसी थीं जो उनके साथ डटी रहीं। पुलकित ने बताया, “मां ने न सिर्फ मेरे सपने को पूरा करने में सपोर्ट किया, बल्कि बाकी परिवार को समझाया और मुझे मुंबई भेजा। उन्हें पूरा यकीन था कि मैं यहां आकर हीरो बनूंगा। उनके इस विश्वास और साहस ने मुझे आज यहां तक पहुंचाया।”

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