शाम होते ही 'भगवान भरोसे' होते हैं सालेकसा के यात्री : 5 बजे के बाद बस सेवा ठप्प, 'माननीय' खामोश

Gondia News: गोंदिया जिले की सालेकसा में सरकारी भत्तों के बावजूद, शाम 5 बजे के बाद परिवहन सुविधाओं की कमी के कारण लोग परेशान हैं। यह स्थिति एसटी विभाग और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को उजागर करती है।
Gondia district Salekasa passengers Bus service stopped after 5 pm
बस (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Gondia Salekasa Bus Service: गोंदिया जिले की आदिवासी बहुल और नक्सल-प्रभावित तहसील सालेकसा, जो सरकारी भत्तों के लिए जानी जाती है, शाम 5 बजे के बाद पूरी तरह से सुनसान हो जाती है। इसका मुख्य कारण है राज्य परिवहन (ST) बसों का शाम ढलते ही गायब हो जाना। सरकारी कार्यालयों, बैंकों और शैक्षणिक संस्थानों की मौजूदगी के बावजूद, यहां के निवासी और कर्मचारी शाम 5 बजे के बाद परिवहन सुविधाओं से वंचित हो जाते हैं, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और एसटी विभाग की उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

यात्रियों की परेशानी और एसटी का 'टालमटोल' रवैया

सालेकसा में वर्तमान में एसटी बस सेवाएं अत्यंत अपर्याप्त हैं। सुबह 6:30 बजे गोंदिया के लिए एक बस निकलती है, जो पानगांव और रोंदा जैसे चुनिंदा गांवों में रुकती है। लेकिन मुंडीपार गोवारीटोला, कावराबांध और झालिया जैसे गांवों में यात्री होने के बावजूद बस नहीं रुकती। जब यात्री इस बारे में एसटी कर्मचारियों से पूछते हैं, तो उन्हें 'यात्री न मिलने' का बहाना बताकर टाल दिया जाता है, जबकि हकीकत कुछ और ही है।

अंधेरे में ग्रामीण, निजी वाहनों का सहारा भी मुश्किल

सालेकसा का गल्लाटोला (पिपरीया) गांव महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित है, जिससे यहां यात्रियों की आवाजाही ज्यादा रहती है। शाम को काम खत्म कर सालेकसा आने वाले ग्रामीण अपने गांवों को जाने के लिए भटकते नजर आते हैं। महंगाई के कारण निजी वाहन भी बंद हो गए हैं, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

दरेकसा, चांदसुरज और डोंगरगढ़ जैसे महत्वपूर्ण मार्गों के लिए भी कोई साधन उपलब्ध नहीं है। यात्रियों को मजबूरी में रात रिश्तेदारों के यहां बितानी पड़ती है या निजी वाहनों को बुलाकर घर जाना पड़ता है। लोहारा, तिरखेडी, बिजेपार जैसे अन्य मार्गों पर भी बसों को यात्री न मिलने का बहाना बताकर बंद कर दिया गया है।

जनप्रतिनिधियों और एसटी विभाग पर सवाल

स्थानीय लोगों का मानना है कि सालेकसा की यह स्थिति एसटी विभाग के लिए शर्मनाक है। जब डोंगरगढ़ के लिए निजी बसें पूरी क्षमता के साथ तीन-तीन फेरे लगा रही हैं, तो एसटी की केवल एक बस क्यों चल रही है? बसों का समय भी अक्सर अव्यवस्थित होता है, जिससे एक ही मार्ग पर तीन बसें एक साथ खड़ी हो जाती हैं और खाली लौट जाती हैं। छात्रों के लिए चलने वाली बसें भी केवल सालेकसा, दरेकसा और आमगांव मार्ग पर चलती हैं, जिससे दूसरे गांवों के छात्रों को बाहर रहकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

एसटी विभाग को इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और सालेकसा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को भी इस ओर ध्यान देकर पहल करनी चाहिए। यह केवल परिवहन का मुद्दा नहीं, बल्कि इस पिछड़े क्षेत्र के विकास और यहां के लोगों की बुनियादी जरूरत से जुड़ा हुआ है।

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