Kharif Crop Loan: खरीफ सीजन से पहले गोंदिया में फसल कर्ज वितरण सुस्त, लक्ष्य का सिर्फ 35% भुगतान
Gondia Crop Loan Distribution: गोंदिया जिले में खरीफ सीजन से पहले फसल कर्ज वितरण की रफ्तार बेहद धीमी है। 495 करोड़ के लक्ष्य में अब तक केवल 229 करोड़ रुपये ही किसानों के खातों में पहुंच पाए हैं।
- Written By: केतकी मोडक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडिया)
Kharif Crop Loan
Gondia Kharif Crop Loan Distribution Report: आगामी खरीफ सीजन शुरू होने में अभी एक महीने से अधिक का समय शेष है, लेकिन गोंदिया जिले में किसानों को फसल कर्ज (क्रॉप लोन) बांटने की रफ्तार काफी सुस्त बनी हुई है। 15 मई 2026 तक की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष के लिए जिले को दिए गए कुल लक्ष्य का केवल 35.10 प्रतिशत हिस्सा ही फसल कर्ज के रूप में आवंटित किया जा सका है। अब तक जिले के किसानों के बैंक खातों में सीधा 229 करोड़ 11 लाख रुपये जमा किए गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में गोंदिया जिला केंद्रीय सहकारी बैंक सबसे आगे दिखाई दे रहा है, जबकि राष्ट्रीयकृत और ग्रामीण बैंकों की सुस्ती लगातार जारी है।
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495 करोड़ के मुकाबले 229 करोड़ का ही हुआ भुगतान
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए गोंदिया जिले को फसली कर्ज वितरण के लिए कुल 495 करोड़ 32 लाख रुपये का बड़ा लक्ष्य दिया गया है। इसके मुकाबले 15 मई तक जिले के केवल 13,303 किसानों के खाते में सीधा कर्ज पहुंच सका है। वर्तमान रिपोर्ट को देखने से यह भी साफ होता है कि बैंकों द्वारा इस समय नए किसानों को ऋण देने के बजाय पुराने कर्ज खातों के नवीनीकरण (रिन्यूअल) पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। 15 मई तक बैंकों द्वारा किए गए कुल भुगतान में से अधिकांश राशि पुराने कर्ज खातों के एडजस्टमेंट और नवीनीकरण में ही उपयोग हुई है।
किस बैंक ने कितना बांटा कर्ज: देखें आंकड़े
जिले में कार्यरत विभिन्न बैंकिंग सेक्टरों द्वारा फसल कर्ज वितरण की स्थिति कुछ इस प्रकार है:
- जिला केंद्रीय सहकारी बैंक: इस बैंक ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 1,28,106 किसानों को 206 करोड़ रुपये का कर्ज वितरित किया है, जो इसके कुल लक्ष्य का 55.66 प्रतिशत है।
- ग्रामीण बैंक: ग्रामीण बैंक ने अब तक केवल 1,224 किसानों को 9 करोड़ 84 लाख रुपये का कर्ज दिया है, जो इसके लक्ष्य का महज 17.50 प्रतिशत है।
- राष्ट्रीयकृत बैंक: इनकी स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। राष्ट्रीयकृत बैंकों ने अब तक सिर्फ 1,139 किसानों को 12.39 करोड़ रुपये का कर्ज वितरित किया है, जो इनके कुल लक्ष्य का केवल 5.90 प्रतिशत बैठता है।
खरीफ की बुआई का समय नजदीक आने के साथ ही जिला बैंक को छोड़कर ग्रामीण और राष्ट्रीयकृत बैंकों की कर्ज वितरण को लेकर यह उदासीन स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है।
जिला बैंक के साथ पक्षपात का आरोप
किसानों के बीच चर्चा है कि राष्ट्रीयकृत व ग्रामीण बैंक की तुलना में जिला सहकारी बैंक में खरीफ फसल कर्ज वितरण की प्रक्रिया बेहद सरल और आसान है। यही वजह है कि स्थानीय किसानों को लगता है कि यह बैंक पूरी तरह उनका अपना है। जिला बैंक हर साल औसतन 350 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 48,000 किसानों को फसल कर्ज वितरित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है।
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लेकिन, इसके विपरीत सरकार के विभिन्न विभागों की महत्वपूर्ण निधियों और सरकारी पैसों को जिला सहकारी बैंकों में जमा करने के बजाय बड़े राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों में जमा किया जाता है। किसानों और जानकारों का मानना है कि यह एक तरह से रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले जिला सहकारी बैंक के साथ बड़ा अन्याय है। यदि जिला बैंक को सरकारी सहयोग मिले, तो किसानों को कर्ज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
