नागपुर कांग्रेस में नए अध्यक्ष की नियुक्ति पर अंदरूनी कलह तेज, चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल

Maharashtra Political News: नागपुर शहर कांग्रेस में नए अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। कई कार्यकर्ताओं ने पारदर्शिता और तय प्रक्रिया को लेकर नाराजगी जताई।
Internal Strife Intensifies in Nagpur Congress Over Appointment of New President; Questions Raised Over Selection Process
नागपुर कांग्रेस, शहर अध्यक्ष विवाद, (सोर्स: सौजन्य AI)
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Maharashtra Congress Politics: नागपुर शहर में कांग्रेस के नये अध्यक्ष के रूप में वरिष्ठ कार्यकर्ता व पदाधिकारी की नियुक्ति कर दी गई है लेकिन इसके साथ अन्य कार्यकर्ताओं में चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाये जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि लगभग आधा दर्जन लोगों ने अध्यक्ष पद के लिए फॉर्म भरा था। चूंकि पार्टी ने एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत निरीक्षक नियुक्त किये थे और उनके द्वारा कार्यकर्ताओं से लेकर तो विधायकों व पदाधिकारियों तक विधानसभा निहाय वन-टू-वन चर्चा की गई थी।

इच्छुकों से आवेदन मंगाये गए थे और उम्मीदवारों से भी वन-टू-वन चर्चा की गई थी। पूरे 5 दिनों की यह प्रक्रिया थी। निरीक्षक ने अपनी रिपोर्ट आलाकमान दिल्ली के पास भेज दी थी। सभी को लग रहा था कि भेजे गए नामों में से किसी एक को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी लेकिन जब नाम आया तो चौंकाने वाला, जिसने आवेदन तक नहीं भरा था उसे अध्यक्ष बना दिया गया।

दबी जुबान से शहर कांग्रेस के अनेक सीनियर कार्यकर्ता भी पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।...तो फिर दिखा वा क्यो...अध्यक्ष पद के दावेदार एक सदस्य ने नाराजी दिखाते हुए कहा कि अगर अध्यक्ष पद का नाम पहले से ही तय था तो फिर चयन प्रक्रिया का दिखावा करने की जरूरत ही क्या थी, पार्टी में लोकतांत्रिक व पारदर्शी कार्यप्रणाली का दावा फिर क्यों किया जाता है।

बताते चलें कि शहर अध्यक्ष पद के लिए विशाल मुत्तेमवार, अतुल कोटेचा, प्रशांत धवड़, गिरीश पांडव, अभिजीत वंजारी, बंटी शेलके, रमन पैगवार, कमलेश समर्थ, मनोहर तांबे, नैश नुसरत अली सहित और भी कुछ नाम चल रहे थे। हालांकि मुत्तेमवार का नाम पहले नंबर पर चल रहा था लेकिन फिर अचानक प्रफुल गुड़धे का नाम प्रमुखता से चर्चा में आ गया था। कोटेचा को नागपुर मनपा में मनोनीत सदस्य के रूप में लिये जाने से वे दावेदारों से बाहर हो गए थे। एक इच्छुक ने दावा किया है कि प्रफुल ने तो आवेदन नहीं किया था।

जिलाध्यक्ष भी बदलेगा

शहर में जिस तरह एक सीनियर पदाधिकारी को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई है उसी तर्ज पर जिलाध्यक्ष भी बदले जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। वर्तमान जिलाध्यक्ष अश्विन बैस का उनके जूनियर व कम अनुभवी होने व केदार गुट का होने के नाम पर विरोध किया जा रहा है। हालांकि चर्चा यह भी है कि पूर्व मंत्री सुनील केदार बैस की अध्यक्षता बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।

हाल ही उनकी दिल्लीवारी के चलते इस चर्चा ने जोर पकड़ा है कि वे अपने कार्यकर्ता के लिए फिल्डिंग लगाने गये थे।

जिलाध्यक्ष के चयन के लिए नियुक्त पर्यवेक्षक ने 22 अप्रैल को अपनी सूची दिल्ली दरबार में भेज दी थी, तया कहा जा रहा था कि सुरेश भोयर और पूर्व जिलाध्यक्ष राजेन्द्र मूलक भी कतार में है। लेकिन दावा किया गया कि बैस के समर्थन में दोनों ने आवेदन नहीं भरा, वहीं दूसरी ओर मुकुल वासनिक के करीबी समझे जाने वाले पूर्व प्रभारी जिलाध्यक्ष बाबा आष्टणकर भी प्रयासरत है।

उमरेड से गंगाधर रेवतकर सहित वरिष्ठ नेता नाना गावंडे भी अपने कार्यकर्ता के लिए फिल्डिंग लगाए हुए है।

मुजीब पठान व प्रकाश वसु का नाम भी चर्चा में था लेकिन जिस तरह शहर अध्यक्ष की नियुक्ति हुई है उससे यह संभावना अधिक है कि अगर अध्यक्ष का बेहरा बदला भी गया ती वह होगा केदार गुट से ही। ऐसा हुआ तो अनुभवी, सीनियर पदाधिकारी व पूर्व जिप अध्यक्ष सुरेश भोयर को पार्टी यह जिम्मेदारी सौंप सकती है।

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