आधार सुधार का महंगा व मुश्किल सफर, प्रशासकीय यंत्रणा की गलती लोगों को पड़ रही भारी
Aadhaar Update Issues: आधार सुधार में नागरिकों को प्रशासकीय गलतियों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। अपडेट के लिए भटकना, अतिरिक्त शुल्क और तकनीकी दिक्कतों से असंतोष बढ़ा है।
- Written By: आंचल लोखंडे
आधार सुधार का महंगा व मुश्किल सफर (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Gondia News: आधार कार्ड बनवाते समय गलत जानकारी दर्ज हो जाने के कारण अब नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्ष 2009 में देश के प्रत्येक नागरिक को एक विशिष्ट पहचान देने के उद्देश्य से आधार योजना लागू की गई थी, लेकिन इतने वर्षों बाद भी नागरिकों को न केवल नया आधार प्राप्त करने में बल्कि उसकी दुरुस्ती कराने में भी भटकना पड़ रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन गलतियों के लिए प्रशासकीय यंत्रणा जिम्मेदार रही, उनकी सुधार प्रक्रिया का बोझ अब नागरिकों पर ही डाला जा रहा है। कई बार आधार अपडेट करवाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी रहती है।
आधार पंजीकरण अभियान
सरकार ने आधार को शासकीय कार्य, बैंकिंग, आर्थिक व्यवहार, सरकारी योजनाएं, नौकरी, व्यवसाय से लेकर खरीद-फरोख्त तक लगभग हर कार्य में अनिवार्य कर दिया है। इसी के चलते डाक विभागों, तहसील कार्यालयों, राजस्व मंडलों, सेतु केंद्रों और अन्य प्रशासनिक माध्यमों से आधार पंजीकरण अभियान बड़े पैमाने पर चलाया गया।
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मगर डेटा संग्रह के दौरान तकनीकी त्रुटियों के साथ-साथ गैर-जिम्मेदार तरीके से जानकारी दर्ज की गई। परिणामस्वरूप अनेक नागरिकों को बार-बार आधार सुधार केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। दरअसल, अधिकांश गड़बड़ियां प्रशासन द्वारा चलाए गए केंद्रों में ही हुईं।
नागरिकों में बढ़ता असंतोष
यदि जानकारी को सही और जिम्मेदारी से संकलित व पंजीकृत किया गया होता, तो नागरिकों को यह अनावश्यक नुकसान नहीं झेलना पड़ता। प्रशासकीय त्रुटियों का दुष्परिणाम झेलते हुए नागरिकों में भारी असंतोष व्याप्त है।
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ऊपर से, निर्धारित स्थानों पर सुधार कराने जाने पर भी लंबी प्रक्रियाएँ, तकनीकी अड़चनें और अतिरिक्त शुल्क की बाध्यता लोगों की परेशानी और बढ़ा देती है। नागरिकों का कहना है कि जब गलती प्रशासकीय यंत्रणा की है, तो सुधार शुल्क भी उन्हें क्यों देना पड़ रहा है?
