लोकल ट्रेन में 15 घंटे तक बेहोश पड़ा रहा यात्री ! रेल पुलिस सहित किसी ने नहीं ली सुध
Central Railway Mumbai: मुंबई लोकल ट्रेन में एक यात्री 15 घंटे तक बेहोश पड़ा रहा, लेकिन रेलवे पुलिस और प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं हुई, जिससे सिस्टम की संवेदनहीनता और लापरवाही पर गंभीर सवाल उठे हैं।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आंचल लोखंडे
Mumbai Local (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai Local Rrain Incident: मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन में तो घटनाएं आम हो गईं हैं। लेकिन संवेदनहीनता एवं सिस्टम की लापरवाही का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है,जिसमें एक बीमार यात्री 15 घंटे तक लोकल ट्रेन के डिब्बे में बेहोश पड़ा रहा और रेलवे पुलिस या प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी।
बताया गया कि पेशे से पत्रकार संजय नागनाथ शिंदे (उम्र 60) शाम 4 बजे से अगले दिन सुबह 7 बजे तक सेंट्रल रेलवे की एक लोकल ट्रेन में करीब 15 घंटे तक बेहोश रहे। इस दौरान न तो किसी यात्री की नजर उनकी खराब हालत पर पड़ी और न तो रेलवे पुलिस ने ही लोकल ट्रेन में बेहोश पड़े व्यक्ति की सुध ली।
क्या था मामला ?
बताया गया कि एक मराठी अखबार से जुड़े संजय शिंदे 15 अप्रैल को हमेशा की तरह धारावी इलाके में रिपोर्टिंग कर रहे थे। वह ट्रेन पकड़ने के लिए शाम करीब 4 बजे सेंट्रल रेलवे के सायन रेलवे स्टेशन पहुंचे। उसके बाद उनके परिवार का उनसे कॉन्टैक्ट नहीं हो पाया। संजय शिंदे का मोबाइल बज रहा था। लेकिन कोई फोन नहीं उठा रहा था। उनकी चिंता होने पर धारावी इलाके में उनके दोस्तों ने देर शाम धारावी पुलिस स्टेशन में उनके मिसिंग की कंप्लेंट दर्ज कराई। फिर देर रात उनकी पत्नी सुषमा संजय शिंदे और बेटे राहुल संजय शिंदे ने डोंबिवली,जहां वे रहते हैं, वहां के स्थानीय पुलिस स्टेशन में कंप्लेंट दर्ज कराई।
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सिस्टम की संवेदनहीनता पर उठे सवाल
इसके बाद 16 तारीख को सुबह करीब 7 बजे रेलवे पुलिस ने राहुल संजय शिंदे को उनके मोबाइल पर बताया कि संजय शिंदे कल्याण रेलवे स्टेशन पर हैं। इसके बाद परिवार वाले वहां पहुंचे। पता चला कि उन्हें इलाज के लिए कल्याण रेलवे स्टेशन इलाके के एक प्राइवेट क्लिनिक में भर्ती कराया गया है। रेलवे पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, संजय शिंदे सुबह 6 से 6:30 बजे के बीच टिटवाला रेलवे स्टेशन पर यार्ड से मुंबई आ रही एक लोकल ट्रेन में मिले थे।
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दूसरे यात्रियों की जानकारी पर पुलिस ने उन्हें कल्याण रेलवे स्टेशन पर उतारा था। उस समय भी बेहोशी की हालत में शिंदे की हालत बहुत गंभीर थी। उनके परिवार ने उन्हें वहां से कल्याण पश्चिम के होली क्रॉस अस्पताल में भर्ती कराया। वहां, दो दिन तक उनका ICU में इलाज चला। फिर उनकी हालत में सुधार हुआ। परिवार ने 60,000 रुपये का बिल चुकाया और उन्हें घर ले आए। उनका अभी भी घर पर इलाज चल रहा है। शिंदे परिवार ने शिकायत की है कि पुलिस ने उन्हें ट्रेन से उतारते समय पीटा और उनके साथ बुरा बर्ताव किया।
लोकांचे दोस्त (पीपल्स फ्रेंड्स ) संस्था ने की रेल प्रशासन से शिकायत
इस अजीबोगरीब मामले में पीपुल्स फ्रेंड्स के प्रेसिडेंट रवि भीलाणे के नेतृत्व में एक डेलीगेशन सेंट्रल रेलवे के जनरल मैनेजर के डिप्टी सेक्रेटरी उमंग दुबे से मुलाकात कर शिकायत की। डेलीगेशन में रवि भीलाणे के साथ ज्योति बडेकर, संजीता मालंकर, प्रकाश महिपति कांबले आदि शामिल थे। रेलवे के पब्लिक कंप्लेंट्स डिपार्टमेंट में भी शिकायत दर्ज कराई गई। संस्था ने सवाल किया कि रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस को एक ऐसे पैसेंजर के बारे में कुछ कैसे पता नहीं चला जो ट्रेन में 15 घंटे तक पड़ा हुआ था।
मुआवजा देने की मांग
आखिर में यार्ड में पहुंचने वाली लोकल ट्रेन की जांच क्यों नहीं की गई? क्या रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन उस पैसेंजर के लिए जिम्मेदार नहीं है जो रेगुलर रेलवे पास या टिकट होल्डर है और ट्रेन में बेहोश हो जाता है?, गंभीर हालत में पैसेंजर को सभी जरूरी सुविधाओं वाले हॉस्पिटल में भर्ती क्यों नहीं कराया गया ? क्या यह रेलवे पुलिस की लापरवाही नहीं है?, मरीज के शरीर पर डंडे से चोट के निशान हैं।
आरोप है कि पुलिस ने मरीज को ट्रेन से उतारते समय डंडे से मारा। संजय शिंदे के बड़े बेटे अमन शिंदे ने कहा कि उनके पिता कोई नशा नहीं किया था। वह एक सम्मानित नागरिक और सीनियर पत्रकार हैं। संगठन ने मांग की है कि रेलवे प्रशासन तुरंत इस मामले की जांच करे और संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करे। उन्हें मुआवजा देने की मांग भी की गई है।
