डायनासोर फॉसिल पार्क उपेक्षा का शिकार (सौजन्य-नवभारत)
Sironcha Dinosaur Fossils Park: गड़चिरोली जिले के आखिरी छोर पर बसे सिरोंचा तहसील के वडधम गांव परिसर में लाखों वर्ष पहले अस्तित्व में आए डायनासोर के जीवाश्म पाए गए है। देश समेत विश्व के वैज्ञानिक, शास्त्रज्ञों ने विश्व के सभी जीवाश्म की तुलना में यहां के जीवनाश्म काफी प्राचीन होने की बात कही थी।
इसका संज्ञान लेते हुए जीवाश्म संरक्षण हेतु फॉसिल पार्क का निर्माण किया गया। लेकिन सरकार व प्रशासन की उदासीनता के कारण इस जीवाश्म पर खतरा मंडराते हुए दिखाई दे रहा है। सिरोंचा तहसील के वडधम गांव समीपस्थ सिरोंचा-आसरअली मार्ग पर 18 किमी दूरी पर जीवाश्म पाए गए थे। यहां का जीवाश्म एक लकड़े की तरह दिखाई देता है।
वन विभाग द्वारा शेड निर्माण कर इस अवशेष (Fossil) का जतन किया जा रहा है। यहां पर वन विभाग ने फॉलिस पार्क नामक उद्यान निर्माण किया गया। लेकिन इस ओर अनदेखी होने के कारण यह उद्यान अब संकट में आ गया है। जीवाश्म का अवशेष अब तक शेष होने के कारण डायनासोर संदर्भ में इस जगह पर पर्यटक हमेशा ही भेंट देते है।
पर्यटकों समेत अभ्यास के लिए भी उक्त स्थल आकर्षण का केंद्र बना है। अंतरराष्ट्रीय दर्जे का पर्यटन के रूप में विकसित होने में बढ़ावा मिल रहा था। लेकिन डायनासोर का अस्तित्व दिखाने वाले उक्त पार्क सरकार की अनदेखी के कारण संकट में पड़ गया है।
सर्वप्रथम 1959 में पहली बार वडधम में अवशेष से दुर्मिल डायनासोर का अस्तित्व पाया गया था। उसकी आयु 150 से 160 दशलक्ष वर्ष हो सकता है, ऐसी बात कही जा रही है। वहीं सिरोंचा के जंगल में वर्ष 2015 में भी वैज्ञानिकों की सहायता से डायनासोर, मत्स्य व पेड़ों का अवशेष (Fossil) जमा किया गया था। इसके बाद वडधम में फॉसिल पार्क तैयार किया गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संशोधन हो, इसलिए 2018 में अमेरिका के नामी जीवाश्म संशोधकों को भारतीय संशोधकों के माध्यम से कोटा फॉर्मेशन में जीवश्म का अभ्यास करने के लिए बुलाया गया था। यहां पर मिले अवशेष पैरों की उंगली, हाथ का हिस्सा, गर्दन का हिस्सा आदि होने का मत अमेरिका के वैज्ञानिकों ने व्यक्त किया। एक ही जगह पर वनस्पति, प्राणी और मच्छली के जीवाश्म देश में केवल सिरोंचा में ही दिखाई देने से विश्व के वैज्ञानिकों के लिए यह स्थल अभ्यास का केंद्र बन रहा है।
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