Gadchiroli News: नंबाला बसवराज की मौत से बौखलाए नक्सली, 10 जून को राष्ट्रव्यापी बंद का किया ऐलान
छत्तीसगढ़ के अबुझमाड़ के जंगलों में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में देश के शीर्ष माओवादी नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसवराज सहित 27 नक्सलियों के मारे जाने के विरोध में माओवादियों ने 10 जून को राष्ट्रव्यापी बंद का एलान किया है
- Written By: आंचल लोखंडे
नंबाला बसवराज की मौत से बौखलाए माओवादी। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
गड़चिरोली: छत्तीसगढ़ के अबुझमाड़ के जंगलों में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में देश के शीर्ष माओवादी नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसवराज सहित 27 नक्सलियों के मारे जाने के विरोध में माओवादियों ने 10 जून को राष्ट्रव्यापी बंद का एलान किया है। माओवादी केंद्रीय समिति के प्रवक्ता ‘अभय’ ने इस मुठभेड़ को गृह मंत्रालय के निर्देश पर की गई पूर्वनियोजित हत्या बताया है।
21 मई को छत्तीसगढ़ के अबुझमाड़ क्षेत्र के गुंडेकोट जंगल में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी, जिसमें माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ गगन्ना उर्फ बसवराज सहित 27 माओवादी मारे गए। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए माओवादियों की केंद्रीय समिति के प्रवक्ता ‘अभय’ ने एक विस्तृत बयान जारी किया है। प्रवक्ता अभय ने कहा कि इस घटना के विरोध में 10 जून को संपूर्ण भारत में बंद किया जाएगा। साथ ही, 11 जून से 3 अगस्त तक मारे गए माओवादियों की स्मृति में श्रद्धांजलि सभाएं एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सरकार पर धोखे का आरोप
अभय ने बताया कि मार्च 2025 में न्यायमूर्ति चंद्रकुमार की अध्यक्षता में केंद्र सरकार द्वारा हैदराबाद में शांति वार्ता समिति गठित की गई थी। माओवादियों ने इसका समर्थन करते हुए संघर्ष विराम की घोषणा की थी। 2 महीने तक संगठन ने अत्यधिक संयम बरता, लेकिन सुरक्षा बलों द्वारा अभियान जारी रखे गए। इस अवधि में 85 माओवादी मारे गए, जिससे वार्ता का विश्वास ही टूट गया।
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बयान में बताया गया कि 2001 से 2025 तक बसवराज ने माओवादी आंदोलन की नीति निर्माण प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाई। उन्होंने पार्टी के कई रणनीतिक दस्तावेजों के निर्माण में मार्गदर्शन किया। उनकी मृत्यु से आंदोलन को गहरा झटका लगा है, परंतु यह स्थायी क्षति नहीं है।
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“एक क्रांतिकारी जाता है, हजार खड़े होते हैं”
प्रवक्ता अभय ने कहा, “1972 में चारु मजूमदार की मृत्यु के बाद भी आंदोलन रुका नहीं। आज भी संघर्ष जारी है। विचार मरते नहीं, वे और दृढ़ होते हैं। एक क्रांतिकारी के बलिदान से आंदोलन और तेज़ होता है।”
