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Gadchiroli News: झाड़ू कटाई से मिल रहा रोजगार, झिंगानुर परिसर की महिलाएं कर रहीं कड़ी मशक्कत

Tribal Women Employment: झिंगानुर परिसर की आदिवासी महिलाएं रोजगार के अभाव में जंगलों से झाड़ू की कटाई कर आजीविका चला रही हैं, जबकि क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी बनी हुई है।

  • By आंचल लोखंडे
Updated On: Jan 13, 2026 | 05:19 PM

Tribal Women Employment:झिंगानुर परिसर (सोर्सः सोशल मीडिया)

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Gadchiroli Tribal News: सिरोंचा तहसील के आदिवासी बहुल झिंगानुर परिसर में रोजगार के सीमित साधनों के कारण स्थानीय महिलाएं झुड़पी जंगलों में जाकर झाड़ू की कटाई कर अपनी आजीविका चला रही हैं। रोज़गार के अन्य विकल्प न होने से ये महिलाएं प्रतिदिन कड़ी मेहनत और मशक्कत करती नजर आ रही हैं।

सिरोंचा तहसील मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित झिंगानुर, रमेशगुडम और कोपेला जैसे गांवों की महिलाएं घने जंगलों में जाकर एक विशेष प्रकार की घास की कटाई करती हैं और उससे झाड़ू तैयार करती हैं। तैयार झाड़ू के गट्ठे बांधकर उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी इलाकों में भी करीब 20 से 25 रुपये प्रति गट्ठा की दर से बेचा जाता है। यह व्यवसाय पिछले कई वर्षों से जारी है।

स्थायी रोजगार नहीं

हर वर्ष जनवरी और फरवरी के महीनों में महिलाएं बड़े पैमाने पर झाड़ू कटाई का कार्य करती हैं। खेती का काम निपटने के बाद इन महिलाओं के पास कोई स्थायी रोजगार नहीं रहता, ऐसे में झाड़ू कटाई उनके लिए आय का एकमात्र साधन बन जाती है।

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सिरोंचा तहसील के आदिवासी पेसा गांवों में रोजगार के अवसर न के बराबर हैं, जिससे महिलाओं को काम की तलाश में भटकना पड़ता है। जान जोखिम में डालकर जंगलों में जाकर विशेष प्रकार की घास काटना और उससे झाड़ू तैयार कर बाजार में बेचना इन महिलाओं की रोजमर्रा की मजबूरी बन गई है। इसी माध्यम से वे अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर रही हैं।

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झिंगानुर परिसर में बुनियादी सुविधाओं का अभाव

झिंगानुर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का घोर अभाव है। गांव में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे पीने के पानी की भी गंभीर समस्या बनी रहती है। हर वर्ष दिसंबर महीने से इस परिसर में जल संकट उत्पन्न हो जाता है। इसके साथ ही क्षेत्र में पक्की सड़कों का अभाव है और नालों पर पुलिया न होने से यातायात व्यवस्था भी बाधित रहती है। सिरोंचा से कोर्ला तक की बस सेवा पिछले 15 वर्षों से स्थायी रूप से बंद है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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Published On: Jan 13, 2026 | 05:19 PM

Topics:  

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