महुआ सीजन की शुरुआत (सौजन्य-नवभारत)
Gadchiroli Forest Department News: गड़चिरोली जिला वनों से संपन्न है। लेकिन कुछ वर्ष पूर्व जिले के वन परिसर में बेखौफ विचरण करने की स्थिति थी। लेकिन गत कुछ वर्षो में जिले में बढ़े हिंसक श्वापदों के चलते यह स्थिति बदल गई है। विगत कुछ वर्षो से जिले में बाघ, तेंदुआ, भालू आदि वन्यजीवों का विचरण जंगलों के साथ ही खेत परिसर में बढ़ गया है। जिससे जंगल के साथ ही जंगल से समीप खेत परिसर में जाना भी खतरनाक बना हुआ है।
जिले में विपुल मात्रा में वन होने के कारण व्यापक मात्रा में वनउपज भी प्राप्त होती है। इस माध्यम से अनेक आदिवासी समेत ग्रामीण क्षेत्र के लोग गुजारा करते हैं। इन दिनों महुआ फूलों का गिरना प्रारंभ हुआ है। जिससे महुआ फूल के संकलन को शुरूआत हुई है।
तड़के से महुआ फूल के संकलन का कार्य किया जाता है। लेकिन जंगल में विचरण करने वाले हिंसक श्वापदों का खतरा भी बढ़ गया है। जिससे महुआ फूल का ‘मोह’ कहीं जान न ले ले, ऐसा भय लोगों में है। लेकिन इसके बावजूद अनेक लोग महुआ फूल का संकलन करने में जुटे हुए हैं।
गड़चिरोली जिले में जंगल के साथ ही खेतों के बांधवों पर व सड़क किनारे बड़े पैमाने पर महुआ के पेड़ है। किसानों के साथ खेत मजदूर जंगल व खेतों के बांधे पर के महुआ फूल चुनने के लिए जाते है। विगत कुछ दिनों से महुआ फूल संकलन की शुरूआत हुई है। यह सीजन करीब एक माह तक चलता है। आगामी माह तक महुआ फूल का संकलन जारी रहने वाला है।
पूर्व के दिनों में जिले में कहीं भी बेखौफ महुआ फूल का संकलन होता था, लेकिन विगत कुछ वर्षो में जिले में बढ़े हिंसक श्वापदों के चलते जंगल व जंगल से सटे खेत परिसर में वनराज का भय निर्माण हुआ है। जिस कारण अनेक लोग महुआ फूल संकलन के लिए जाने से कतरा रहे हैं, लेकिन कुछ लोग महुआ के मोह में अपनी जान जोखिम में डालकर महुआ फूल का संकलन कर रहे है। महुआ फूल के संकलन के दौरान सतर्कता बरतनी आवश्यक है। वनविभाग द्वारा नागरिकों को सतर्कता बरतने का आह्वान किया जा रहा है।
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बीते कुछ वर्षो में बाघ द्वारा किए गए हमलों में अनेक लोगों ने जाने गंवाई है। इस दौरान महुआ संकलन के मोह में गए लोगों पर भी बाघ, तेंदुए द्वारा हमले हुए हैं। जिसमें उन्हें जान गंवानी पड़ी है। विगत कुछ दिनों से जिले में बाघ के हमलों की घटनाएं देखने को नहीं मिली है। लेकिन जंगल परिसर में वनराज के अनेक लोगों को दर्शन हो रहे है। जिससे जंगल परिसर में बाघ का विचरण कायम है।
महुआ फूल चुनने के लिए रात के दौरान या तड़के ही अनेक लोग जंगल में जाते हैं। ऐसे में हिंसक श्वापदों द्वारा हमले की घटनाएं होने की संभावना रहती है। जिससे नागरिकों को सतर्क रहना जरूरी है। महुआ फूल संकलन के लिए अकेले न जाएं, गुट में आवाज करते हुए महुआ संकलन के लिए जाएं। तड़के नहीं बल्कि सुबह के दौरान महुआ संकलन के लिए जाना चाहिए ऐसी बात कहीं जा रही है।