गड़चिरोली: महुआ के फूलों ने बदली आदिवासी महिलाओं की किस्मत, वंदना गावडे के बचत समूह ने किया 80 लाख का टर्नओवर

Gadchiroli News: गड़चिरोली की वंदना गावडे ने महुआ के फूलों से 24 तरह के व्यंजन बनाकर 80 लाख का व्यवसाय खड़ा किया है। इससे आदिवासी महिलाओं को रोजगार मिला हैं।
Vandana Gawade from Gadchiroli turned Mahua flowers into a 80 lakh business. Her SHG produces 24 types of snacks, providing local employment and aiming for international exports soon.
गड़चिरोली महुआ के फूलों ने बदली आदिवासी महिलाओं की किस्मत (सोर्स: नवभारत)
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Gadchiroli Tribal Entrepreneurs News: गड़चिरोली राज्य के आखिरी छोर पर बसे जिले में उद्योग की कमी है। जिसके कारण जिले के नागरिक रोजगार पाने के लिए बाहर राज्य अथवा बाहर जिलों में जाते है। लेकिन जिले की एटापल्ली तहसील अंतर्गत आने वाले जीवनगट्टा गांव की एक आदिवासी महिला की पहल से महिला बचत समूह के माध्यम से अनेक महिलाओं को रोजगार मिलने के साथ ही महुआ फूल से तैयार किए जाने वाले व्यंजन से महिला बचत समूह ने 80 लाख रुपयों तक की लेनदेन की है। एटापल्ली तहसील के जीवनगट्टा निवासी वंदना गावडे 2 अक्टूबर 2024 में आदिवासी महिला बचत समूह का निर्माण किया।

और वर्ष 2006 में महुआ फूल प्रक्रिया का प्रशिक्षण लेने के बाद सफर की शुरुआत हुई। विशेषतः वर्ष 2011 में जिलास्तरीय प्रदर्शनी में प्रथम स्थान मिलने के बाद उनका हौसला और भी बुलंद हो गया। शुरुआत में केवल 2 हजार रुपयों से संघर्ष करने वाली इस बचत समूह की महिलाओं को अब 50 हजार रुपयों तक मासिक आय मिल रही है।

24 तरह के व्यंजन

जीवनगट्टा के आदिवासी लक्ष्मी महिला बचत समूह द्वारा महुआ फूल के करीब 24 तरह के व्यंजन बनाए जाते है। जिनमें प्रमुखता से लड्डू, बर्फी, अंजीर बर्फी, चिक्की, जैम, चटनी जैसे स्वादिष्ट व्यंजन का समावेश है। इसके अलावा अंबाडी, करवंद और टमाटर से छह तरह के अचार भी बनाए जाते है। जो वर्तमान में लोगों की पसंदीदा व्यंजन बन गए है।

विशेषतः लोगों की मांग पूर्ण करने के लिए स्थानीय स्तर पर 60 क्विंटल महुआ फूल कम पड़ने से सीधे मध्यप्रदेश राज्य से बुलाकर प्रक्रिया उद्योग शुरू रखा गया है। केवल स्थानीय बाजार पर निर्भर न रहते हुए गावडे ने कॉपरेंट और विश्व क्षेत्र पर भी छलांग मारी है। त्रिवेणी और लाइफ मैक्स जैसी कंपनियों को प्रति माह से 5 से 20 हजार नग उत्पादन भिजवाया जाता है।

विदेशों में भी निर्यात करने का गावडे ने लिया संकल्प

  • विदेश में भी महुआ फूल निर्यात होकर जल्द ही जीएसटी और एक्सपोर्ट लाइसेंस की प्रक्रिया पूर्ण कर यह व्यवसाय विश्वस्तर पर पहुंचाने का गावडे का संकल्प है।
  • पुणे, मुंबई, नोएडा, दिल्ली और शिमला जैसे बड़े शहरों में उनके माल की मार्केटिंग करने के लिए एक टीम भी कार्यरत है।
  • विशेषतः वंदना गावडे ने गड़चिरोली, चंद्रपर और गोंदिया जिले के 12 आश्रमशालाओं में छात्रों के पोषाहार में महुआफूल लड्डू का समावेश कर कुपोषण को रोकने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
  • चंदना गावडे का कार्य वर्तमान में सैकड़ों आदिवासी महिलाओं के लिए प्रेरणास्थान बना हुआ है।
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