गड़चिरोली: सिरोंचा के जाफ्राबाद में पेयजल संकट बरकरार, उपयोग के बिना धूल खा रही घंटागाड़ी
Water Tank Project Failure: जाफ्राबाद ग्राम पंचायत में लाखों की पानी टंकियां और नई घंटागाड़ी निष्क्रिय पड़ी हैं। भाकपा ने निष्पक्ष जांच और ऑडिट की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी।
- Written By: केतकी मोडक
पानी की टंकी (सोर्स - फोटो नवभारत)
Gadchiroli Panchayat Water Supply Negligence: गड़चिरोली जिला मुख्यालय से दूर सिरोंचा तहसील के अंतर्गत आने वाली जाफ्राबाद ग्राम पंचायत से भ्रष्टाचार और घोर प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। जाफ्राबाद ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जाने के बावजूद धरातल पर ग्रामीणों को इसका कोई अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।
स्थिति यह है कि गांव में ग्रामीणों की सुविधा के लिए बनाई गई दो पानी की टंकियां और स्वच्छता व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लाखों रुपये में खरीदी गई नई घंटागाड़ी लंबे समय से बिना इस्तेमाल के कबाड़ में तब्दील हो रही हैं। ग्राम पंचायत के इस लचर ढर्रे से स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
लाखों की पानी टंकियां बंद
जाफ्राबाद के नागरिकों को नियमित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रशासन ने भारी-भरकम निधि खर्च कर गांव में दो विशाल पानी की टंकियों का निर्माण करवाया था। कागजों पर तो यह योजना पूरी तरह सफल दिख रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ये टंकियां वास्तविक रूप से कितनी कार्यरत हैं, यह खुद एक बड़ा रहस्य बना हुआ है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि टंकियां बनने के बाद भी उन्हें आज तक सुचारू रूप से पानी की सप्लाई नहीं मिली है और महिलाओं को भीषण गर्मी में दूर-दराज के हैंडपंपों से पानी ढोना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या ने सीधे तौर पर ग्राम पंचायत की पूरी कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे
पानी के संकट के साथ-साथ गांव की स्वच्छता व्यवस्था का भी बुरा हाल है। कुछ समय पहले ग्राम पंचायत को गांव की गलियों से कचरा इकट्ठा करने के लिए एक नई चमचमाती घंटागाड़ी उपलब्ध कराई गई थी। लेकिन दुर्भाग्य से, उद्घाटन के बाद से ही इस वाहन का उपयोग करने की जहमत प्रशासन ने नहीं उठाई।
आज यह वाहन ग्राम पंचायत परिसर में खड़ा-खड़ा केवल धूल खा रहा है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जब वाहन चलाना ही नहीं था, तो इसे खरीदकर सरकारी धन का खुला दुरुपयोग क्यों किया गया? इस फिजूलखर्ची के लिए जिम्मेदार दोषियों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
सार्वजनिक ऑडिट और निष्पक्ष जांच की मांग
गड़चिरोली ग्राम पंचायत की इस मनमानी के खिलाफ अब राजनीतिक और सामाजिक संगठन भी सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के सिरोंचा तहसील सचिव रवि बारसागंडी ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन से विस्तृत जांच की मांग की है।
बारसागंडी ने अपनी प्रमुख मांगों में कहा है कि:
- जाफ्राबाद ग्राम पंचायत में पिछले कुछ वर्षों में जितने भी विकास कार्य हुए हैं, उनकी निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए।
- विकास कार्यों पर खर्च की गई सरकारी निधि का सार्वजनिक लेखा-जोखा (पब्लिक ऑडिट) ग्रामीणों के सामने प्रस्तुत किया जाए।
- निष्क्रिय पड़ी दोनों पानी की टंकियों और धूल खा रही घंटागाड़ी को तत्काल प्रभाव से चालू किया जाए।
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भाकपा सचिव ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों के भीतर इस दिशा में कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वे समस्त ग्रामीणों को साथ लेकर ग्राम पंचायत कार्यालय के समक्ष एक व्यापक और उग्र जन-आंदोलन छेड़ेंगे। अब देखना यह है कि इस गंभीर शिकायत के बाद गड़चिरोली जिला प्रशासन जाफ्राबाद की सोई हुई पंचायत व्यवस्था को जगाने के लिए क्या कानूनी हंटर चलाता है।
