मोबाइल टावर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Gadchiroli Municipal Council: गड़चिरोली शहर में नगर परिषद प्रशासन की अनुमति के बिना विभिन्न मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों द्वारा कई स्थानों पर मोबाइल टावर लगाए जाने की चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। विशेष रूप से कुछ स्थानों पर सरकारी भूमि पर मोबाइल टावर खड़े किए गए हैं और उनका किराया अतिक्रमण करनेवाले नागरिकों द्वारा वसूला जा रहा है।
इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण शहर में बिना अनुमति वाले मोबाइल टावरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सरकार द्वारा मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए स्पष्ट नियम एवं दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं। टावर लगाने से पहले नगरपालिका की लिखित अनुमति, संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाणपत्र, अग्निशमन विभाग की मंजूरी तथा नागरिकों की आपत्ति न होने का प्रमाण आवश्यक होता है।
लेकिन गड़चिरोली शहर में अनेक मोबाइल टावर इन सभी नियमों का उल्लंघन कर लगाए गए हैं। चिंता का विषय यह है कि कई टावर घनी आबादी वाले क्षेत्रों, रिहायशी इमारतों की छतों तथा संकरी जगहों पर लगाए गए हैं। इन स्थानों पर न तो संरचनात्मक मजबूती की जांच की गई है और न ही निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है।
इससे तेज हवाओं, भारी बारिश या किसी प्राकृतिक आपदा के दौरान नागरिकों की जान और संपत्ति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। सरकारी भूमि पर लगाए गए मोबाइल टावरों को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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यदि सरकारी संपत्ति का उपयोग कर निजी व्यक्तियों या कंपनियों द्वारा किराया वसूला जा रहा है, तो यह सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। इस मामले में राजस्व विभाग तथा नगर परिषद प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बावजूद इसके अब तक किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
शहर में मोबाइल टावर के जाल बिछे होने से स्थानीय नागरिकों में इस विषय को लेकर भारी नाराजगी है। नागरिकों का कहना है कि अवैध मोबाइल टावरों के कारण स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ गया है। पहले से ही मोबाइल टावरों से निकलने वाले विकिरण को लेकर आशंकाएं जताई जाती रही हैं, ऐसे में नियमों को ताक पर रखकर लगाए गए टावर नागरिकों के लिए और अधिक खतरनाक साबित हो सकते हैं।
नागरिकों ने मांग की है कि नगर परिषद प्रशासन तत्काल शहर में स्थापित सभी मोबाइल टावरों की जांच करें, बिना अनुमति लगाए गए टावरों को हटाया जाए, सरकारी भूमि पर हुए अतिक्रमण को समाप्त किया जाए तथा दोषी व्यक्तियों और संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता।