प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Gadchiroli Bodi Based Farming: गड़चिरोली आकांक्षी जिले के एटापल्ली तहसील में जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने तथा किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर ‘बोड़ी-आधारित कृषि प्रणाली’ परियोजना लागू की जा रही है। इस परियोजना के माध्यम से जल सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा निरंतर ग्रामीण आजीविका सुजित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
यह परियोजना बाडेन एनिलीन एंड सोडा फैक्टरी (बीएएसएफ) के आर्थिक सहयोग से तथा बायफ आजीविका एवं विकास संस्था के माध्यम से क्रियान्वित की जा रही है। इस संबंध में 14 जनवरी 2026 को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। परियोजना की अवधि 15 जनवरी से 31 दिसंबर तक निर्धारित की गई है।
1 करोड़ 34 लाख रुपये का प्रावधान परियोजना के प्रथम चरण में एटापल्ली तहसील के पांच गांवों को शामिल किया गया है। इसके लिए कुल 1 करोड़ 34 लाख 14 हजार 400 रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इसमें से 1 करोड़ 25 लाख 48 हजार 400 रुपये बीएएसएफ द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि शेष राशि लाभार्थी सहभागिता और विभिन्न शासकीय योजनाओं के समन्वय से जुटाई जाएगी।
परियोजना के अंतर्गत बोड़ियों से गाद निकालना, जल भंडारण क्षमता बढ़ाना तथा सिंचाई सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। पहले वर्ष में 70 हजार घनमीटर गाद निकासी, 70 हजार घनमीटर जल भंडारण क्षमता का निर्माण, 350 एकड़ क्षेत्र को सिंचाई के दायरे में लाने का लक्ष्य तय किया गया है।
इसके परिणामस्वरूप खरीफ मौसम में लगभग 300 एकड़ धान क्षेत्र को संरक्षित सिंचाई मिलेगी, जबकि रबी मौसम में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र के लिए आवश्यक नमी उपलब्ध हो सकेगी।
परियोजना में शामिल परिवारों की वर्तमान औसत वार्षिक आय लगभग 45 हजार रुपये है। चरणबद्ध तरीके से आय बढ़ाकर आने वाले कुछ वर्षों में इसे दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है, साथ ही जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिमों को कम करते हुए फसल उत्पादकता में 30 से 35 प्रतिशत तक वृद्धि होने की उम्मीद है।
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महिला बचत समूहों और भूमिहीन परिवारों को आजीविका का सहारा परियोजना के तहत 10 हजार 500 वन पौधों का रोपण, 100 महिला बचत समूह सदस्यों को आयवर्धक गतिविधियों के लिए सहयोग तथा भूमिहीन परिवारों के लिए सूक्ष्म उद्योग शुरू कर सतत आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे, प्रशिक्षण, रिपोर्ट और परिणामों का दस्तावेजीकरण इस पहल से 300 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, जबकि 1,500 किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, परियोजना के प्रभावों के आकलन हेतु प्रारंभिक अध्ययन रिपोर्ट, अर्थवार्षिक एवं वार्षिक रिपोर्ट के साथ-साथ दृश्य-भव्य दस्तावेजीकरण भी तैयार किया जाएगा।