Mundhwa Land Dispute: पार्थ पवार की कंपनी ने 21 करोड़ के नोटिस को दी चुनौती, IGR के सामने होगी बड़ी सुनवाई
Mundhwa Land Deal Pune: मुंधवा जमीन सौदे में पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी ने 21 करोड़ के स्टांप ड्यूटी नोटिस के खिलाफ अपील दायर की है। अब IGR कार्यालय में सुनवाई होगी।
- Written By: अनिल सिंह
Mundhwa Land Deal Pune Ajit Pawar Son (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Stamp Duty Dispute 21 Crores: पुणे के मुंधवा इलाके में 40 एकड़ सरकारी जमीन के सौदे को लेकर पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी ‘अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी’ की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। महाराष्ट्र पंजीकरण विभाग द्वारा जारी 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी के नोटिस के खिलाफ कंपनी ने अब अपील दायर की है। इस अपील के बाद अब पूरे मामले की गेंद पंजीकरण महानिरीक्षक (IGR) के पाले में चली गई है, जहाँ इस विवादित सौदे और स्टांप शुल्क की छूट पर विस्तृत सुनवाई होगी।
यह मामला उस समय गरमाया जब 300 करोड़ रुपये के इस भूमि सौदे में सरकारी नियमों के उल्लंघन और स्टांप ड्यूटी की चोरी के आरोप लगे।
21 करोड़ का नोटिस और 10 फरवरी की डेडलाइन
पंजीकरण विभाग ने अमाडिया एंटरप्राइजेज और उसके साझेदार दिग्विजय पाटिल को एक सख्त नोटिस जारी कर 10 फरवरी 2026 तक बकाया स्टांप ड्यूटी जमा करने का आदेश दिया था। विभाग का तर्क है कि जिस जमीन का सौदा किया गया, वह मूल रूप से सरकारी जमीन है। बिक्री विलेख (Sale Deed) के समय कंपनी को दी गई स्टांप शुल्क की छूट नियमों के विरुद्ध थी, जिसे अब ब्याज समेत वसूला जाना चाहिए। हालांकि, कंपनी ने भुगतान करने के बजाय कानूनी विकल्प चुनते हुए इस आदेश को ऊपरी स्तर पर चुनौती दे दी है।
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300 करोड़ का सौदा और सरकारी जमीन का पेच
यह पूरा विवाद पुणे के मुंधवा में स्थित 40 एकड़ जमीन के हस्तांतरण से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि अमाडिया एंटरप्राइजेज ने इस जमीन को लगभग 300 करोड़ रुपये में बेचने का सौदा किया था। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि यह जमीन ‘सरकारी’ श्रेणी में आती है। विभाग का कहना है कि व्यावसायिक लाभ के लिए किए गए इतने बड़े सौदे में सरकारी खजाने को स्टांप ड्यूटी के रूप में चूना लगाया गया है। इसी आधार पर पंजीकरण विभाग ने पूर्व में माफ की गई राशि को वापस जमा करने का निर्देश दिया था।
IGR के सामने सुनवाई: अब आगे क्या?
पंजीकरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि कंपनी की अपील प्राप्त हो गई है। अब पंजीकरण महानिरीक्षक (IGR) के सामने होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि 21 करोड़ रुपये की मांग जायज है या नहीं। कंपनी को अब यह साबित करना होगा कि उन्हें मिली स्टांप ड्यूटी की छूट किन तकनीकी आधारों पर सही थी। यदि IGR कंपनी की दलीलों से सहमत नहीं होते हैं, तो पार्थ पवार से जुड़ी इस कंपनी को भारी भरकम जुर्माना और बकाया राशि चुकानी होगी, अन्यथा जमीन की रजिस्ट्री पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं।
