गड़चिरोली फर्जी मंजूरी घोटाला: मुख्य आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी दबोचा गया
Gadchiroli Fake Letterhead: गड़चिरोली में फर्जी जिलाधिकारी लेटरहेड और नकली हस्ताक्षर से करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की कथित मंजूरी देने के मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
- Written By: अंकिता पटेल
गड़चिरोली, फर्जी लेटरहेड,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Gadchiroli Fake Letterhead District Collector: गड़चिरोली जिले में जिलाधिकारी के फर्जी लेटरहेड और हूबहू नकली हस्ताक्षर का उपयोग कर करीब 4 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लिए फर्जी प्रशासनिक स्वीकृति (प्रशासनिक मंजूरी) आदेश तैयार करने के बहुचर्चित मामले में पुलिस ने पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी आशीष पिपरे को रविवार मध्यरात्रि छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार कर लिया है।
इस मामले में पुलिस को मंत्रालय के 2 कर्मचारियों सहित कुल सात लोगों की संलिप्तता का संदेह है। सूत्रों के अनुसार 2 भाजपा पदाधिकारियों के नाम भी चर्चा में हैं। जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
करीब एक सप्ताह से चल रही जांच के बाद की गई इस गिरफ्तारी को मामले में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। पुलिस अब इस पूरे फर्जीवाड़े की परत-दर-परत जांच कर रही है।
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गिरफ्तार आशीष पिपरे चामोर्शी नगर पंचायत का मनोनीत पार्षद रह चुका है, जबकि उसकी पत्नी भाजपा की पार्षद है। हालांकि भाजपा जिला अध्यक्ष के अनुसार लगभग तीन महीने पहले ही पिपरे को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
और खुलासे होने की संभावना
जांच एजेंसियों को यह भी संदेह है कि इससे पहले भी इसी तरह के फर्जी प्रशासनिक स्वीकृति आदेशों के माध्यम से कई विकास कार्यों को मंजूरी दिलाने का प्रयास किया गया था। यदि यह आशंका सही साबित होती है तो मामला केवल एक फर्जी आदेश तक सीमित न रहकर एक बड़े संगठित रैकेट का रूप ले सकता है।
जिलाधिकारी जैसे सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी के नाम और हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर सरकार को गुमराह करने के इस गंभीर मामले पर पूरे जिले की नजर बनी हुई है। पहली गिरफ्तारी के बाद अब यह जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच से इस बहुचर्चित फर्जीवाड़े से जुड़े कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
गहराई से हो रही जांच
सूत्रों के मुताबिक आशीष पिपरे एक पूर्व राज्य मंत्री के निजी सहायक (पीए) के रूप में भी कार्य कर चुका है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इसी राजनीतिक संपर्क का फायदा उठाकर जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) निधि के विकास कार्यों के लिए फर्जी प्रशासनिक स्वीकृति आदेश तैयार किए गए।
चामोर्शी के पार्षद पिंपरे को 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा
जिलाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर लगभग 4 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दिलाने का प्रयास करने के आरोप में गिरफ्तार चामोर्शी के पार्षद आशीष पिपरे को पुलिस ने सोमवार को गडचिरोली के जिला तथा सत्र न्यायालय में पेश किया।
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सुनवाई के बाद न्यायालय ने उसे 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इस मामले में अब पुलिस जांच तेज होने की संभावना है। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि जिलाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर के इस प्रकरण में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब नागरिकों की नजर पुलिस की आगे की जांच पर टिकी हुई है।
