गड़चिरोली में रेलवे, उद्योग और आधारभूत विकास को मिलेगी रफ्तार, आदिवासी विश्वास पर जोर
Gadchiroli Development Plan: गड़चिरोली में मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल व डीजीपी सदानंद दाते की बैठक में नक्सलोत्तर बदलाव, सौर ऊर्जा, रेलवे व 'लिविंग मेमोरियल' पर ऐतिहासिक निर्णय हुए।
- Written By: केतकी मोडक
विकास योजना के लिए गढ़चिरौली पुलिस अधिकारियों की बैठक (सोर्स - फोटो नवभारत)
Post Naxal Gadchiroli Infrastructure Projects: गड़चिरोली सुरक्षा बलों द्वारा नक्सलवादियों को पीछे हटने पर मजबूर किए जाने के बाद अब उन क्षेत्रों में उत्पन्न प्रशासनिक खामियां प्रशासन को प्रभावी सेवाओं, विकास कार्यों और जनसंपर्क के माध्यम से भरना होगा। आने वाले 10 वर्षों में गड़चिरोली का स्वरूप बदलने का ऐतिहासिक अवसर उपलब्ध है। प्रशासन को जनकेंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए आदिवासी समाज का विश्वास जीतने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
ऐसा कथन महाराष्ट्र के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गड़चिरोली में आयोजित राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक में कही। महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित जिलों के नक्सलोत्तर परिवर्तन को लेकर आयोजित राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल की अध्यक्षता तथा गड़चिरोली पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते की प्रमुख उपस्थिति में संपन्न हुई। बैठक में नक्सलवाद समाप्त होने के बाद दुर्गम क्षेत्रों में विकास, प्रशासन और मूलभूत सेवाओं के विस्तार के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
मुख्य सचिव ने कहा कि जंगलों के संसाधनों के वास्तविक मालिक आदिवासी नागरिक हैं। वन विभाग तथा प्रशासन को मालिक नहीं बल्कि ‘सुविधादाता’ की भूमिका निभानी चाहिए। नागरिकों की जरूरतों को समझकर संवेदनशीलता के साथ सेवाएं उपलब्ध कराने से शासन और समाज के बीच की दूरी और कम होगी। उन्होंने कहा कि गड़चिरोली जिले में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश, स्टील परियोजनाएं, रेलवे, हवाई अड्डा तथा अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाएं शुरू हो रही हैं।
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इन अवसरों का लाभ स्थानीय युवाओं को मिले, इसके लिए व्यापक कौशल विकास कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता है। अन्यथा उच्च पदों पर बाहरी लोगों की नियुक्ति होगी और स्थानीय युवाओं को सीमित रोजगार ही मिल पाएगा। मुख्य सचिव ने बताया कि सवा सौ वर्षों की प्रतीक्षा के बाद गड़चिरोली में रेलवे पहुंच रही है। साथ ही समृद्धि महामार्ग का विस्तार नागपुर, चंद्रपुर, गोंदिया और गड़चिरोली तक करने को मंजूरी दी गई है।
उन्होंने खनन परियोजनाओं की मंजूरी और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को कानूनी नियुक्ति होगी और स्थानीय युवाओं को सीमित रोजगार ही मिल पाएगा। मुख्य सचिव ने बताया कि सवा सौ वर्षों की प्रतीक्षा के बाद गड़चिरोली में रेलवे पहुंच रही है। साथ ही समृद्धि महामार्ग का विस्तार नागपुर, चंद्रपुर, गोंदिया और गड़चिरोली तक करने को मंजूरी दी गई है।
उन्होंने खनन परियोजनाओं की मंजूरी और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को कानूनी दायरे में रहकर तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। किसानों को रात में खेतों में जाने की आवश्यकता न पड़े, इसके लिए दिन के समय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा विद्युत वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए। जिले के 33 हजार कृषि पंपों के सौर ऊर्जा आधारित विद्युतीकरण को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई।
नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता : दाते
पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते ने कहा कि वर्ष 1980 से शुरू हुई सशत्र नक्सली गतिविधियों को सुरक्षा बलों ने निर्णायक झटका दिया है। यह भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था की बड़ी जीत है। उन्होंने बताया कि इस संघर्ष में महाराष्ट्र के 244 पुलिस जवान और 609 नागरिकों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया।
दाते ने कहा कि सी-60 बल के चुनिंदा जवानों से अत्याधुनिक प्रशिक्षण प्राप्त विशेष ‘एलिट फोर्स’ तैयार की जा रही है, जिसका उपयोग राज्य और राष्ट्रीय स्तर की विशेष सुरक्षा एवं अभियान संबंधी जिम्मेदारियों में किया जाएगा। शेष जवानों को शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से नए अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभाव कम होने के बाद अब गड़चिरोली पुलिस को घरेलू हिंसा, चोरी, सेंधमारी, यातायात प्रबंधन तथा अन्य पारंपरिक अपराधों पर अधिक ध्यान देना होगा।
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शहीदों की स्मृति में बनेगा ‘लिविंग मेमोरियल’
नक्सलवाद विरोधी संघर्ष के इतिहास को संरक्षित करने के लिए गड़चिरोली जिले में अत्याधुनिक ‘लिविंग मेमोरियल’ और संग्रहालय स्थापित करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। इसके माध्यम से शहीद जवानों के बलिदान की प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाई जाएगी। बैठक की शुरुआत में जिलाधिकारी अविश्यांत पांडा ने गड़चिरोली जिले के नक्सलोत्तर परिवर्तन रोडमैप की प्रस्तुति दी।
गोंदिया के जिलाधिकारी डॉ. मंगेश गोंडावले तथा जिला पुलिस अधीक्षक एम। रमेश ने भी जिले की सुरक्षा स्थिति और विकासात्मक पहलों की जानकारी दी। बैठक में नागपुर, गोंदिया और गड़चिरोली के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।
