

Maratha Protest Radhakrishna Vikhe Patil: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर चल रही शांत चर्चाएं अचानक एक बड़े और आक्रामक टकराव में तब्दील हो गई हैं। अब तक जो प्रदर्शनकारी सरकार के कुछ सकारात्मक फैसलों और वादों की सराहना कर रहे थे, वे अचानक सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे रमेश केरे पाटिल और उनके सहयोगियों ने आज सुबह मराठा उप-समिति के अध्यक्ष और वरिष्ठ मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल के मुंबई स्थित बंगले पर गुप्त तरीके से प्रवेश किया और अपनी मांगों को लेकर वहीं धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शनकारियों ने विखे पाटिल को अपनी मांगों का एक विस्तृत विवरण सौंपते हुए साफ कहा कि अब सरकार के आश्वासनों पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर चालबाजी का आरोप भी लगाया है।
इस अचानक हुए उग्र आंदोलन के पीछे सरकार द्वारा जारी किया गया एक नया सरकारी आदेश (GR) है। रमेश केरे पाटिल ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व में जब मंत्री विखे पाटिल और विधायक प्रसाद लाड ने मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल खत्म करवाई थी, तब पूरे महाराष्ट्र और विशेषकर मराठवाड़ा के मराठा समुदाय को बड़ी उम्मीदें थीं कि उन्हें न्याय मिलेगा। लेकिन सरकार ने जो आदेश निकाला है, उसके अनुसार केवल उन्हीं मराठा भाइयों को कुनबी प्रमाणपत्र (Kunbi Certificate) दिए जाएंगे जिनके पास साल 1967 से पहले के कुनबी रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। केरे पाटिल का दावा है कि खुद विखे पाटिल ने यह स्वीकार किया है कि हैदराबाद गजट के अनुसार मराठवाड़ा के अधिकांश मराठा भाइयों को यह सर्टिफिकेट नहीं मिल पाएगा, जो कि समुदाय के साथ सरासर धोखा है।
विखे पाटिल के बंगले पर धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप है कि राज्य सरकार मराठा उप-समिति द्वारा किए गए वादों को समय पर पूरा करने में पूरी तरह विफल रही है। मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल समाप्त हुए लंबा वक्त बीत चुका है, लेकिन उनकी मूल और मुख्य मांगों पर कैबिनेट द्वारा कोई ठोस या स्थाई निर्णय नहीं लिया जा रहा है। निर्णय प्रक्रिया में जानबूझकर की जा रही इस देरी और टालमटोल के कारण युवाओं में असंतोष की भावना बेहद तीव्र हो गई है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, सरकार केवल समय काटने के लिए कागजी फैसले ले रही है, जिससे जमीनी स्तर पर मराठा समाज के छात्रों और बेरोजगारों को ओबीसी (OBC) वर्ग की तर्ज पर कोई वास्तविक रियायत या लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विखे पाटिल के बंगले पर चल रहे इस हाई-ड्रामे के समानांतर, मुंबई के ही गिरगांव चौपाटी इलाके में भी सुरक्षा व्यवस्था बेहद चाक-चौबंद कर दी गई है। 'मराठा क्रांति ठोक मोर्चा' के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने दोपहर 3 बजे अरब सागर में 'जल विसर्जन आंदोलन' करने का एलान किया था। इस आंदोलन के जरिए संगठन सरकार से यह तीखा जवाब मांगना चाहता है कि आखिर इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा को अरब सागर में क्यों स्थापित नहीं किया गया है। हालांकि, कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मुंबई पुलिस ने मुस्तैदी दिखाई और मराठा आंदोलन शुरू होने से पहले ही ठोक मोर्चा के कई प्रमुख कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।